UP चुनाव 2027: मायावती ने कसी कमर, कार्यकर्ताओं को दिया ‘करो या मरो’ का मंत्र; प्राइवेट सेक्टर और महंगाई पर सरकार को घेरा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की रणभेरी बजने से पहले ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक्शन मोड में आ गई है। मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भविष्य की चुनावी बिसात बिछाते हुए पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की। इस बैठक में मायावती ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि अब ‘जुमलेबाजी’ का वक्त खत्म हो चुका है और जमीन पर काम करने का समय आ गया है।

संगठन की ‘सर्जरी’ और आर्थिक मजबूती पर जोर

​मायावती ने राज्य और जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों की क्लास लेते हुए संगठन की जमीनी और आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने साफ किया कि जनाधार बढ़ाने के लिए दिए गए पिछले निर्देशों पर क्या प्रगति हुई है, इसकी रिपोर्ट और बेहतर होनी चाहिए। मायावती ने कड़े लहजे में चेतावनी दी कि संगठन के काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​”प्राइवेट सेक्टर के भरोसे आत्मनिर्भर नहीं बनेगा देश”

​बैठक के दौरान मायावती ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की ‘आत्मनिर्भरता’ की नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा “क्या देश सिर्फ प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर रहकर आत्मनिर्भर बन सकता है?” उन्होंने आरोप लगाया कि विकास का लाभ केवल मुट्ठी भर सत्ताधारी लोगों तक सिमट कर रह गया है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।

​वैश्विक युद्ध और महंगाई की मार

​मिडिल-ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि वैश्विक तनाव की वजह से भारत की रसोई का बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगी आग ने दैनिक उपभोग की वस्तुओं को महंगा कर दिया है। उन्होंने चिंता जताई कि इसका सबसे घातक असर गरीब और मेहनतकश समाज पर पड़ा है, जिनकी परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।

बसपा से बढ़ीं जनता की उम्मीदें

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि वर्तमान सरकारों की उदासीनता से त्रस्त जनता अब एक बार फिर बसपा की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे पूरी निष्ठा, मेहनत और लगन के साथ जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं को उठाएं। मायावती ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी और ‘रोजी-रोटी’ के संकट को 2027 के चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने के संकेत दिए हैं।