आगरा। ब्रज के प्राचीन वन ‘अग्रवन’ और पावन यमुना के तट पर आयोजित श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ का श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ अपने चरम पर है। कथा के छठवें दिन का दृश्य अद्भुत था, जहाँ पूरा कथा मंडपम भक्ति, भाव और महारास की दिव्यता से सराबोर हो उठा। आयोजन स्थल पर विराजमान 24 फुट ऊँचे श्रीनाथजी की प्रतिमा और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की आभा के बीच जब गोपी गीत के स्वर गुंजायमान हुए, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें भक्तिभाव से नम हो गईं।
ब्रज की महिमा और श्रीनाथजी का स्वरूप
कथा व्यास महंत योगेश पुरी ने प्रवचन के दौरान श्रीनाथजी और गिरिराज महाराज के गूढ़ महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीनाथजी प्रभु का निर्गुण स्वरूप हैं, जबकि गोवर्धन पर्वत उनके सगुण-साकार स्वरूप के प्रतीक हैं।
उन्होंने आगरा (अग्रवन) की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब भगवान शिव बालकृष्ण के दर्शन हेतु कैलाश से पधारे थे, तो उन्होंने सर्वप्रथम इसी भूमि पर अपना आसन जमाया था। उन्होंने ब्रज के 84 कोस की परिक्रमा को ठाकुरजी के शरीर का ही विस्तार बताया जहाँ मुखारविंद, मानसी गंगा, चंद्र सरोवर और राधाकुंड जैसे पावन तीर्थ प्रभु के विभिन्न अंगों के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
आत्मा-परमात्मा के मिलन का प्रतीक ‘महारास’
रास पंचाध्यायी का वर्णन करते हुए महंत जी ने स्पष्ट किया कि महारास केवल नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा में विलीन होने का मार्ग है। जब गोपियाँ श्रीकृष्ण के प्रेम में अपनी सुध-बुध खो बैठीं, तब वे स्वयं प्रेम और भक्ति का साक्षात स्वरूप बन गईं। कथा के दौरान जब उन्होंने ‘गोपी गीत’ का गायन किया, तो पूरा मंडपम वृंदावन जैसा प्रतीत होने लगा। शंखनाद और मृदंग की ध्वनि के बीच श्रद्धालु मानो आध्यात्मिक आनंद की पराकाष्ठा पर पहुँच गए थे।
यमुना आरती और भव्य आयोजन
कार्यक्रम के अंतर्गत दैनिक यजमानों पूजा बंसल, अनीता गुप्ता, विनोद गुप्ता, सरोज गुप्ता, अमर गुप्ता, रोमी गुप्ता और सूर्य प्रताप सिंह ने श्रीमद्भागवत जी का पूजन किया। संध्या के समय यमुना तट पर की गई भव्य आरती ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिलाधिकारी मनीष बंसल और भाजपा मीडिया प्रभारी माधवी अग्रवाल सहित भारी संख्या में भक्तों ने इस पुनीत अवसर का लाभ उठाया।
भविष्य की रूपरेखा
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि ज्ञान यज्ञ अब समापन की ओर है। रविवार को सुदामा चरित्र और व्यास पूजन का आयोजन किया जाएगा। वहीं, सोमवार को एकादशी व्रत कथा, भव्य भंडारे और पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का विश्राम होगा।


