संसद में बहस का असली मुद्दा: शोर और प्रतीकों से आगे, जनता की ज़िंदगी से जुड़े सवाल

लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि जनता की रोज़मर्रा की तकलीफों को सत्ता के सबसे ऊँचे मंच तक पहुँचाने की प्रक्रिया है। भारत में यह मंच संसद है, जहाँ हर चर्चा का केंद्र जनता की समस्याएँ और उनके समाधान होने चाहिए। दुर्भाग्यवश, बीते वर्षों में संसद की बहसें कई बार ऐसे विषयों […]

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वोट चोरी के आरोपों पर गरजे राहुल गांधी, रामलीला मैदान से BJP, RSS पर सीधा हमला, बोले—यह सत्य और असत्य की लड़ाई

नई दिल्ली। कांग्रेस द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी महारैली’ में पार्टी नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP), RSS और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस संघर्ष को सत्य और असत्य के बीच की लड़ाई बताते हुए केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने और चुनावी प्रक्रिया में […]

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फेक ब्रेकिंग की दौड़ में मीडिया की गिरती साख…

कभी समाचार माध्यमों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, क्योंकि वे समाज को दिशा देते थे, सत्ता से सवाल करते थे और जनता तक सत्य पहुंचाते थे। लेकिन टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के विस्तार के बाद “सबसे पहले खबर दिखाने” की अंधी होड़ ने मीडिया की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुंचाई है। […]

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लोकतंत्र की अदालत में पत्रकारों पर अब रात का फैसला?

क्या आपने कभी सोचा था कि एक रात को आपके घर के दरवाज़े पर कोई दस्तक दे और कहे कि अब से आपके बोलने की आज़ादी नहीं रही? क्या आपने सोचा था कि देश की अदालतें अब रात के अँधेरे में भी फैसला सुना सकती हैं? क्या अदालत में बिना आपके सुने, बिना नोटिस दिए, […]

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भाजपा के झूठ और भ्रष्टाचार से जनता परेशान, 2027 में सपा लाएगी बदलाव, अखिलेश यादव का बड़ा दावा

लखनऊ। चुनाव 2027 की तैयारी में अभी से जुट जाने का आह्वान करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा की साजिशों के प्रति सावधान किया। उन्होंने कहा कि, भाजपा लोकतंत्र के विरुद्ध चुनावों में धांधली की योजना बनाने की रणनीति पर काम करने में जुट गई है। जनता […]

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लोकतंत्र को बीमार कर रही प्रेस पर पाबंदी…क्या पत्रकारों की कलम बंद करने से देश आगे बढ़ेगा?

दुनिया के कई देशों में इन दिनों प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है. खासकर भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में, जहां सरकार की नीतियों की आलोचना करने और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाने पर पत्रकारों पर बड़े पैमाने पर मुक़दमे दर्ज किए जा रहे हैं. इसका सीधा असर विश्व […]

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स्वतंत्रता का अधूरा आलाप… क्या लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव रह गया है?

“आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था। तिरंगे की फहराती लहरों […]

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महाराजा संपादक: जब बंद हो जाए चौपाल और लगने लगे दरबार…फिर किसके लिए हैं अखबार?

जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए, तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती है। आज बड़े संपादक आम आदमी से कट चुके हैं, गाँव-कस्बों की आवाज़ें अखबारों में गुम हैं। संवाद की जगह प्रचार ने ले ली है। सत्ता और पूँजी के एजेंडे चलाए जा रहे हैं। अब […]

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अंग्रेजों के खंडित भारत में पहुँच गया 21वीं सदी का इंडिया

एक बार महात्मा गांधी ने कहा था, “सच्चा लोकतंत्र केंद्र में बैठकर राज्य चलाने वाला नहीं होता, बल्कि यह तो प्रत्येक व्यक्ति के सहयोग से चलता है।” इस भावना को समझते हुए देश को कई इकाइयों में बांटा गया। प्रदेश, जिला, ब्लॉक इत्यादि। यह प्रशासनिक व्यवस्था अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए की गई। […]

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भारत के चुनावों में हस्तक्षेप की कोशिश के रूस के बयान पर अमेरिकी राजदूत ने दी प्रतिक्रिया

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने भारत के लोकतंत्र पर टिप्पणी की है. एरिक गार्सेटी ने कहा है कि अगले 10 साल में भारत जीवंत लोकतंत्र होगा. नई दिल्ली में एक इवेंट में हिस्सा लेते हुए एरिक गार्सेटी ने कहा, “भारत आज की तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के मामले में अगले 10 […]

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