लोकतंत्र की अदालत में पत्रकारों पर अब रात का फैसला?

क्या आपने कभी सोचा था कि एक रात को आपके घर के दरवाज़े पर कोई दस्तक दे और कहे कि अब से आपके बोलने की आज़ादी नहीं रही? क्या आपने सोचा था कि देश की अदालतें अब रात के अँधेरे में भी फैसला सुना सकती हैं? क्या अदालत में बिना आपके सुने, बिना नोटिस दिए, […]

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कलम की ताकत से आज भी घबराते हैं तानाशाह…

एक अकेले रवीश की आवाज दबाने के लिए क्या-क्या जुगत न लगाए गए! चैनल पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश हुई, प्रमोटर तोड़ने की कोशिश हुई, छापा वापा हुआ, अफवाहें फैलीं और एक उद्योगपति की रखैल बनी यह तानाशाही आखिरकार जीत गई। यह अंत नहीं है, क्लाइमेक्स तो अब भी बाकी है। रवीश कुमार के इस्तीफे […]

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रवीश कुमार: क्या यूपी में बीजेपी अभी भी मनोवैज्ञानिकल रुप से प्रबल दल है?

-रवीश कुमार- क्या बीजेपी मनोवैज्ञानिक रुप से एक मज़बूत पार्टी बची रह गई है? दस मार्च को यूपी में क्या नतीजे आएंगे इसके पहले इस सवाल की नज़र से बीजेपी के चुनाव प्रचार को देखा जाना चाहिए। बीजेपी एक प्रबल दल है। यह एक ऐसी पार्टी है जिसे इलेक्टोरल बॉन्ड के लागू होने के बाद […]

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