लखनऊ/नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सोमवार का दिन ऐतिहासिक रूप से निराशाजनक रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर नीचे गिर गया। रुपये की इस रिकॉर्ड तोड़ गिरावट ने देश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा की साख पर कड़ा प्रहार किया है।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: 95.20 पर पहुंचा भाव
वैश्विक बाजार में अस्थिरता और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने (Capital Outflow) के चलते रुपया 0.3% गिरकर 95.20 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अस्थिरता रोकने के लिए बैंकों की विदेशी मुद्रा स्थिति पर सीमाएं सख्त करने जैसे कई कड़े कदम उठाए गए थे, लेकिन बाजार के दबाव के आगे ये प्रयास नाकाफी साबित हुए।
अखिलेश यादव का तीखा हमला: ‘नैतिक दीवालियापन की पराकाष्ठा’
रुपये की इस गिरावट को लेकर अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा“गिरने के मामले में रुपये और भाजपा की छवि के बीच ज़बरदस्त मुक़ाबला चल रहा है। जैसे-जैसे भाजपाई लोगों के कांड-कुकर्मों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो रहा है वैसे-वैसे भाजपाई छवि और भी नीचे गिरती जा रही है।”
सपा प्रमुख यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे जोड़ा कि भाजपाइयों के भ्रष्टाचार के खुलासे तो हो रहे हैं लेकिन इस्तीफे नहीं। उन्होंने भाजपा पर ‘नैतिक दीवालियापन’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अब यह पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है।
विपक्ष ने घेरी आर्थिक नीतियां
अखिलेश यादव के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी से आयात महंगा होगा, जिसका सीधा असर देश में महंगाई पर पड़ सकता है। आरबीआई हालांकि स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन वैश्विक कारकों और विदेशी पूंजी के पलायन ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।

