अयोध्या। राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी मामले में न्यायिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक ओर अदालत ने आरोपियों की हिरासत बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस मामले को लेकर अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रशासन और ट्रस्ट के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है।
अदालती कार्रवाई: हिरासत बढ़ी
सोमवार को इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं स्पेशल जज (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन) कोर्ट नंबर-1 के न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में हुई। सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से सभी आठ आरोपियों को जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से किसी भी आरोपी की रिमांड की मांग नहीं की गई, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 13 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
वकीलों का कड़ा अल्टीमेटम
मामले में सबसे बड़ा मोड़ फैजाबाद बार एसोसिएशन के निर्णय के बाद आया है। वकीलों ने राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को सीधे निशाने पर लेते हुए उन्हें अयोध्या छोड़ने का तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। बार एसोसिएशन का तर्क है कि इस घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट का नेतृत्व कटघरे में है।
वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर ये पदाधिकारी अयोध्या नहीं छोड़ते हैं, तो वे पूरे शहर में चक्का जाम कर देंगे। वकीलों ने यह भी साफ किया है कि इसके बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति को शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
सियासी और प्रशासनिक हलचल
वकीलों के इस फैसले ने अयोध्या के प्रशासनिक और सियासी हलकों में भारी खलबली मचा दी है। राम मंदिर जैसा संवेदनशील मुद्दा होने के कारण प्रशासन अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। स्थानीय स्तर पर बढ़ते जन-आक्रोश और वकीलों की इस चेतावनी के बाद अयोध्या की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। फिलहाल, सभी की निगाहें ट्रस्ट के अगले कदम और प्रशासन द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों पर टिकी हैं।


