टेक्सटाइल सेक्टर में नई क्रांति: भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मशीनरी गठबंधन का आगाज

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मुंबई: भारत के कपड़ा उद्योग को वैश्विक मानचित्र पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुंबई में एक बड़े औद्योगिक अध्याय की शुरुआत हुई है। ‘ब्रिटिश टेक्सटाइल मशीनरी एसोसिएशन’ (BTMA) और ‘इंडिया ITME सोसाइटी’ ने हाथ मिलाते हुए ‘यूके-इंडिया टेक्सटाइल मशीनरी गठबंधन’ को लॉन्च किया है। यह रणनीतिक कॉरिडोर न केवल दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि भारतीय मिलों में ब्रिटिश तकनीक और ऑटोमेशन का नया युग लेकर आएगा।

​इस विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ भारत की टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई ने किया। समारोह में ब्रिटिश उप उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ टेक्सटाइल जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। इस गठबंधन का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को ब्रिटेन की उच्च-स्तरीय मशीनरी, डिजिटल समाधान और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों से लैस करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में इजाफा हो सके।

​2030 का लक्ष्य और मशीनी आधुनिकीकरण

भारतीय कपड़ा उद्योग ने साल 2030 तक 350 अरब डॉलर के टर्नओवर का महा-लक्ष्य तय किया है। सरकार की ‘पीएम मित्रा’ पार्क और पीएलआई (PLI) जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं ने आधुनिक मशीनों की जरूरत को कई गुना बढ़ा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 53% टेक्सटाइल मिलें अगले तीन सालों के भीतर अपनी मशीनरी को अपग्रेड करने की योजना बना रही हैं। ऐसे में यह गठबंधन भारतीय उद्यमियों के लिए किफ़ायती और विश्वस्तरीय तकनीक हासिल करने का एक सुनहरा द्वार साबित होगा।

​FTA और भविष्य की राह

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि आगामी भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस साझेदारी के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। समझौता लागू होने पर ब्रिटिश मशीनरी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में भारी कटौती या समाप्ति की उम्मीद है, जिससे व्यापार में भारी उछाल आएगा। साथ ही, यह साझेदारी ‘इको-फ्रेंडली’ और सस्टेनेबल उत्पादन तकनीकों पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई ने संबोधन में कहा कि भारत का टेक्सटाइल क्षेत्र वर्तमान में एक बड़े परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। यह गठबंधन नवाचार और ग्लोबल स्टैंडर्ड की मशीनों के जरिए भारतीय उद्योगों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

वहीं, ब्रिटिश प्रतिनिधियों ने इसे केवल व्यापार नहीं, बल्कि तकनीकी ज्ञान और सस्टेनेबल डेवलपमेंट का एक साझा प्लेटफॉर्म करार दिया। आगामी महीनों में इस पहल के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, बिजनेस डेलीगेशन और तकनीकी संवादों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

-अनिल बेदाग