आगरा। सिकंदरा स्थित आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-7 स्थित श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में धर्म, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ वैज्ञानिक संत आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज एवं मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। भक्तिमय माहौल के बीच शुरू हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
णमोकार मंत्र का गहन मर्म
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने णमोकार मंत्र के प्रथम पद की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि जैन दर्शन में यह मंत्र सर्वोपरि है।
उन्होंने ‘अरिहंत’ शब्द का अर्थ समझाते हुए बताया कि ‘अरि’ का अर्थ है शत्रु, और जो आत्मा के वास्तविक शत्रुओं—ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय तथा अंतराय कर्मों—का पूर्ण नाश कर देते हैं, वही अरिहंत परमेष्ठी हैं।
आचार्य श्री ने ‘अरहंत’ और ‘अरुहंत’ पदों के अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया कि जिनका जन्म-मरण का चक्र सदैव के लिए समाप्त हो गया है, ऐसे प्रभु को नमन करना ही मोक्ष का मार्ग है।
संस्कार और चरित्र निर्माण पर जोर
आचार्य श्री ने न केवल बड़ों को बल्कि मंदिर की श्री शान्तिनाथ पाठशाला के बच्चों को भी नैतिक जीवन की प्रेरणा दी। उन्होंने आह्वान किया कि बचपन से ही बच्चों में धार्मिक संस्कारों का बीजारोपण होना चाहिए, ताकि वे एक आदर्श चरित्र का निर्माण कर सकें। वहीं, मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संयम और आत्मशुद्धि का महत्व समझाते हुए सदाचारी जीवन जीने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में दिखी एकजुटता
इस पुनीत आयोजन को सफल बनाने में सकल जैन समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, कोषाध्यक्ष मगन चंद जैन, विजय जैन निमोरब, महेश चंद जैन, सुशील जैन, सुदीप जैन, अरुण जैन, सतेंद्र जैन, नीरज जैन, मनोज जैन, संजय जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, अमित जैन, सिद्धार्थ जैन, मोहित जैन, वैभव जैन, प्रशांत जैन, गौरव जैन, शुभम जैन, अभिषेक जैन तथा मीडिया प्रभारी राहुल जैन समेत बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य श्री के मंगल प्रवचनों से लाभान्वित होकर आत्मकल्याण का संकल्प लिया।


