यूपी विधानसभा का मॉनसून सत्र 3 अगस्त से: अनुपूरक बजट के साथ राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सदन में हो सकता हैं महासंग्राम

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधानमंडल के आगामी मॉनसून सत्र की औपचारिक घोषणा कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कैबिनेट बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रदेश का विधानमंडल सत्र आगामी 3 अगस्त (सोमवार) से शुरू होकर 6 अगस्त तक चलेगा। यह सत्र न केवल विधायी कार्यों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी गहमागहमी भरा रहने के आसार हैं।

विधायी एजेंडा और संवैधानिक अनिवार्यता

​कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदानों की मांगें विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी। इसके साथ ही, पिछले सत्रावसान के बाद शासन के महत्वपूर्ण निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए प्रख्यापित अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक भी सदन में प्रस्तुत कर पारित कराए जाएंगे।

​लोक भवन के मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता करते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद-174 तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली के अनुसार, विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता।

चूंकि पिछला सत्र 30 अप्रैल को आहूत हुआ था और 7 मई 2026 को सत्रावसान हुआ था, इसलिए संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप यह सत्र बुलाया जाना अनिवार्य था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमावली के तहत माननीय सदस्यों को सत्र की सूचना सात दिन पूर्व उपलब्ध कराई जा रही है।

​राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर गरमाएगी सियासत

इस सत्र के दौरान राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा विपक्ष के लिए सबसे बड़ा हथियार बना हुआ है। समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह हमलावर रुख अपनाएंगे। गौरतलब है कि इस मामले में अयोध्या पुलिस द्वारा एसआईटी जांच के तहत अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ में कई अहम राज सामने आए हैं।

​दूसरी ओर, भाजपा सरकार सदन में एसआईटी के गठन से लेकर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश करेगी। अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा सरकार पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच, सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की पूरी संभावना है।

कुल मिलाकर, 3 से 6 अगस्त तक चलने वाला यह संक्षिप्त सत्र विधायी कार्यों और राम मंदिर मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान के कारण पूरी तरह से हंगामेदार रहने के आसार हैं।