आगरा में भक्ति का महाकुंभ: श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’, ध्रुव-प्रह्लाद प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु

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आगरा: ब्रज की पावन धरा और यमुना तट पर इन दिनों अध्यात्म और भक्ति की अविरल धारा बह रही है। यमुना किनारा रोड स्थित ताज व्यू गार्डन (फेस-1) में श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के तत्वावधान में आयोजित ‘श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ’ का तृतीय दिवस भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ रही है, श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का सैलाब बढ़ता जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर बना 24 फुट ऊंचा श्रीनाथजी का विग्रह, द्वादश ज्योतिर्लिंग और भगवान के 24 अवतारों की झांकी दर्शनार्थियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

​मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुआ कथा मंडपम

​कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से महंत योगेश पुरी ने भक्ति के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने मंत्र शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु कृपा और अटूट धर्मनिष्ठा ही मनुष्य के जीवन को सफल बनाती है। इसी संकल्प के बल पर छत्रपति शिवाजी महाराज ने अखंड भारत का सपना साकार किया था।

कथा के दौरान महंत जी ने भक्तों को “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 1008 बार सामूहिक जाप कराया, जिससे पूरा कथा स्थल दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो उठा। उन्होंने भक्तों को सीख दी कि भगवान और संतों के दरबार में कभी अपमान का भय नहीं रखना चाहिए।

​भक्त प्रह्लाद और ध्रुव की अटूट आस्था का दर्शन

महंत योगेश पुरी ने अत्यंत भावुक अंदाज में बालक ध्रुव और भक्त प्रह्लाद के चरित्रों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रह्लाद की निष्काम भक्ति से विवश होकर भगवान नरसिंह को स्तंभ से प्रकट होना पड़ा। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि सच्ची साधना और भावपूर्ण प्रार्थना में इतनी शक्ति है कि स्वयं नारायण अपने भक्त की रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं।

आध्यात्मिक अनुष्ठान और संस्कार शिविर की अनूठी पहल

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि यह महायज्ञ केवल कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुबह यमुना जल से रुद्राभिषेक के साथ शुरू होकर दिनभर विभिन्न संस्कारिक गतिविधियों में बदल जाता है। ‘बाल संस्कार शिविर’ के माध्यम से नई पीढ़ी को श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान, विज्ञान, स्वामी विवेकानंद के आदर्श और देशभक्ति की शिक्षा दी जा रही है। इस कार्य में गीता परिवार के राजीव गुप्ता पथ, राजेंद्र गोयल, डॉ. दीप्ति, डॉ. ज्योति गुप्ता समेत अनेक विद्वान अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

​श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था

मठ प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी श्रद्धालु को आने-जाने में कष्ट न हो। इसके लिए बिजलीघर, दरेसी और हाथी घाट जैसे प्रमुख बिंदुओं से 30 ई-रिक्शा की निःशुल्क सेवा संचालित की जा रही है। प्रतिदिन होने वाली यमुना आरती और गौ पूजन कथा स्थल के वातावरण को और भी अधिक सात्विक व दिव्य बना देते हैं।

​आयोजकों ने बताया कि कथा के चतुर्थ दिवस यानी गुरुवार को भगवान के ‘वामन अवतार’ के वर्णन के साथ-साथ ‘श्रीकृष्ण जन्मोत्सव’ का भव्य प्रसंग सुनाया जाएगा, जिसको लेकर भक्तों में भारी उत्साह है।