दिल्ली के पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराने में 7.5 घंटे लग गए, सोचिए गांव और छोटे शहरों के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा- राहुल गांधी

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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली के संसद मार्ग थाने में पैलेट गन से घायल एक पीड़ित छात्र की एफआईआर दर्ज कराने के लिए करीब साढ़े सात घंटे तक कड़ा संघर्ष और धरना देना पड़ा। इसके बाद राहुल गांधी ने इसे न्याय का पहला कदम बताते हुए कहा कि आखिरकार मामला दर्ज कर लिया गया है।

​पीड़ित छात्र साहिल की स्थिति के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उसके शरीर और आंख में छर्रे धंसे हुए हैं। उसके दिल के बिल्कुल पास भी छर्रे लगे हैं और एक आंख से उसे अब दिखाई नहीं दे रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि वे सुबह 11:30 बजे एफआईआर दर्ज कराने आए थे, लेकिन पुलिस ने शाम करीब 06:45 बजे जाकर एफआईआर दर्ज की। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि सोचने वाली बात यह है कि जब देश की राजधानी दिल्ली के बीचोंबीच स्थित पुलिस स्टेशन पर न्याय पाने में इतना लंबा समय लग रहा है, तो देश के दूर-दराज के गांवों और छोटे शहरों के थानों में आम आदमी की क्या स्थिति होती होगी।

​उन्होंने आगे कहा कि हमने हिंदुस्तान के एक साधारण नागरिक और उसके पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की और इस प्रक्रिया में भी करीब साढ़े सात घंटे का समय लग गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब गृह सचिव (Home Secretary) और अमित शाह की तरफ से अंतिम अनुमति (Final Permission) दी गई, तब जाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इससे यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस एफआईआर को असल में कौन रोक रहा था। पुलिस खुद मामला दर्ज करना चाहती थी, लेकिन ‘ऊपर’ से न्याय की प्रक्रिया पर पूरी तरह ब्रेक लगा दी गई थी।

​इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एफआईआर की कॉपी साझा करते हुए लिखा कि जननायक राहुल गांधी ने करीब साढ़े सात घंटे तक लगातार धरना देकर अमित शाह और उनकी दिल्ली पुलिस को घुटनों पर ला दिया और आखिरकार एफआईआर दर्ज करनी ही पड़ी। पार्टी ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि “सही कहते हैं—झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”