हेग (नीदरलैंड): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को वैश्विक स्तर पर “अवसरों की भूमि” (Land of Opportunities) के रूप में परिभाषित करते हुए कहा है कि देश इस समय एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने गर्व से घोषणा की कि आज के नए भारत की आकांक्षाएं अब केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं रह गई हैं। अपनी पांच देशों की आधिकारिक यात्रा के दूसरे चरण में नीदरलैंड के हेग पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने वहां रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत आज बेहद बड़े सपने देख रहा है और देश की युवा शक्ति आसमान छूने की आकांक्षा रखती है।
”हमें केवल परिवर्तन नहीं, सर्वश्रेष्ठ और सबसे तेज गति चाहिए”
प्रवासी भारतीयों के जोरदार स्वागत और गूंजती तालियों के बीच अपने लगभग 40 मिनट से अधिक लंबे संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा “एक समय था जब हम सिर्फ बदलाव की बात करते थे, लेकिन आज का भारत डंके की चोट पर कह रहा है कि हमें केवल परिवर्तन ही नहीं चाहिए, बल्कि हमें दुनिया में ‘सर्वश्रेष्ठ’ चाहिए और वह भी सबसे ‘तेज गति’ के साथ। यही कारण है कि जब आज के भारत के पास असीमित आकांक्षाएं हैं, तो उन सपनों को सच करने के लिए हमारे प्रयास भी असीमित और अथक होते जा रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में देश ने दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सफल एआई (AI) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की है। इससे पहले भारत ने जी20 (G20) शिखर सम्मेलन का भी ऐतिहासिक और सफल आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सफलताएं अब कोई एक बार की घटना (One-time event) नहीं हैं, बल्कि यह आज के सशक्त भारत का नया और स्थायी स्वरूप बन चुकी हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत की छलांग: 4 से बढ़कर हुए 125 यूनिकॉर्न
देश की तकनीकी और आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप नेटवर्क बन चुका है। साल 2014 के आंकड़ों को याद दिलाते हुए उन्होंने बताया कि तब भारत में केवल 4 ‘युकॉर्न’ (एक अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) कंपनियां थीं, लेकिन आज देश में लगभग 125 से ज्यादा सक्रिय यूनिकॉर्न कंपनियां देश की अर्थव्यवस्था को गति दे रही हैं। आज हमारे युवा और उनके स्टार्टअप्स एआई (AI), रक्षा (Defense) और अंतरिक्ष (Space) जैसे अत्यंत जटिल क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। भारत में अब अनुसंधान (Research) और नवाचार (Innovation) की यह संस्कृति जन-जन तक पहुंच चुकी है।
सीमाओं से परे भारत का लक्ष्य: ओलंपिक मेजबानी से लेकर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब तक
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लक्ष्य अब बहुत बड़े हो चुके हैं। भारत अब ओलंपिक खेलों की मेजबानी करना चाहता है, दुनिया का सबसे पसंदीदा ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनना चाहता है, हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में पूरी दुनिया का नेतृत्व करना चाहता है और विश्व अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।
हाल के विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र में मतदाताओं का उत्साह नए रिकॉर्ड बना रहा है, जहां 80-90 प्रतिशत तक मतदान हो रहा है। विशेषकर महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी भारत के लोकतंत्र को और अधिक परिपक्व और मजबूत बना रही है।
ट्यूलिप और कमल का अनूठा संदेश और विपक्ष पर तंज
हल्के-फुल्के अंदाज में विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने हेग में रहने वाले भारतीयों से मजाकिया लहजे में पूछा कि क्या भारत का लोकप्रिय नाश्ता ‘झालमुड़ी’ यहां भी मिलता है? नीदरलैंड के ट्यूलिप (Tulip) फूलों के लिए प्रसिद्ध होने की बात को भारत के राष्ट्रीय फूल कमल (Lotus) से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने एक गहरा दार्शनिक संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “ट्यूलिप और कमल दोनों ही हमें यह अनूठी सीख देते हैं कि आपकी जड़ें चाहे पानी में डूबी हों या फिर धरती के भीतर गहरी हों, दोनों ही परिस्थितियों में वे अपनी सुंदरता, आभा और आंतरिक शक्ति प्राप्त कर लेते हैं।”
वैश्विक संकटों के बीच भारत की सांस्कृतिक विरासत अटूट
वैश्विक संघर्षों और कोविड महामारी के बाद उपजी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आगाह किया कि यह दशक पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौतियों का काल बनता जा रहा है। यदि इन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में तेजी से सुधार नहीं हुआ, तो मानव जाति द्वारा पिछले कई दशकों में हासिल की गई बड़ी उपलब्धियां व्यर्थ हो सकती हैं। ऐसे माहौल में भारत और नीदरलैंड मिलकर वैश्विक परियोजनाओं को हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक साथ बेहतरीन समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि समय की मार के साथ दुनिया की कई बड़ी सभ्यताएं मिट गईं, लेकिन भारत की विविधतापूर्ण और समृद्ध संस्कृति आज भी यहां के लोगों के दिलों में धड़क रही है। पीढ़ियां बदल गईं, देश बदल गए और पूरा वातावरण बदल गया, लेकिन हमारे सनातन पारिवारिक मूल्य आज भी पूरी तरह अटल और अटूट हैं। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री शुक्रवार को नीदरलैंड पहुंचे हैं।


