आगरा। ताजनगरी में इनर रिंग रोड लैंड पार्सल (तृतीय चरण) के भूमि अधिग्रहण का विवाद एक बार फिर गरमा गया है। इसके विरोध में मंगलवार को प्रखर किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने अचानक मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और वहीं धरने पर बैठ गए। दोपहर 12:00 बजे से लेकर 12:20 बजे तक चले इस बेहद आक्रामक और त्वरित विरोध प्रदर्शन ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए मंडलायुक्त ने तुरंत एक्शन लिया और आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के उपाध्यक्ष (VC) समेत भूमि अधिग्रहण से जुड़े तमाम उच्च अधिकारियों को अपने दफ्तर में तलब कर लिया।
”16 साल से झेल रहे मार, अब और बर्दाश्त नहीं” — किसानों की दो टूक
कमिश्नरी परिसर में धरने पर बैठे आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन और एडीए पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि उनकी कीमती जमीनों को अधिग्रहित किए हुए 16 साल से अधिक का लंबा समय बीत चुका है। इतने वर्षों के बाद भी प्रभावित किसान परिवारों को न तो किसी सरकारी कल्याणकारी योजना का लाभ मिला और न ही नियमानुसार उचित मुआवजा दिया गया।
मंडलायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में किसानों ने साफ शब्दों में अपनी दो टूक मांगें रखीं या तो अधिग्रहित की गई जमीन को वर्तमान बाजार दर (मार्केट रेट) के अनुसार चार गुना मुआवजा देकर तत्काल सेटल किया जाए। अथवा, किसानों की जमीनों का अधिग्रहण रद्द कर उन्हें भूमि वापस सौंपी जाए।
मंडलायुक्त ने तत्काल बुलाई बैठक, 19 मई को होगा आर-पार का फैसला
किसानों के उग्र तेवरों को देखते हुए मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप ने तत्काल प्रभाव से एडीए वीसी, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLO) और एसडीएम सदर कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई। किसानों के प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन लेने के बाद अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर प्राथमिक समीक्षा की गई। हालांकि, मौके पर सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की शत-प्रतिशत उपलब्धता न होने के कारण विस्तृत चर्चा के लिए 19 मई 2026 को सुबह 11:00 बजे किसानों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक तय की गई है। माना जा रहा है कि इस आगामी बैठक में जमीन वापसी या चार गुना मुआवजे की मांग पर कोई बहुत बड़ा और निर्णायक फैसला हो सकता है।
“पहले चरण को चार गुना मुआवजा, तो तीसरे फेज के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?”
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने सरकार की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनहितैषी आदेशों का पालन स्थानीय प्रशासन को हर हाल में करना ही होगा। उन्होंने याद दिलाया कि 26 अगस्त 2024 को आगरा सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में यह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया गया था कि पहले चरण के प्रभावित किसानों को आज की संशोधित दरों के हिसाब से चार गुना मुआवजा दिया जा चुका है। ऐसे में तृतीय चरण (फेज-3) के किसानों को उस अधिकार से वंचित रखना सीधा और स्पष्ट अन्याय है।
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 19 मई की बैठक में किसानों की जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को पूरे मंडल स्तर पर उग्र रूप दिया जाएगा। इस धरने में मुख्य रूप से रोहता, इटौरा, जाखोड़ा, पंचगाई और देवरी समेत करीब दर्जनभर गांवों के पीड़ित किसान शामिल हुए।
”अन्याय पर तुला है एडीए, खड़ा करेंगे जनआंदोलन”
किसान प्रतिनिधि डॉ. महावीर सिंह चाहर ने कड़े शब्दों में एडीए की कार्यप्रणाली की निंदा करते हुए कहा कि विकास प्राधिकरण लगातार अन्नदाताओं का शोषण करने पर तुला हुआ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों की इस गहरी पीड़ा को नजरअंदाज करने वाले असंवेदनशील अधिकारियों के खिलाफ बहुत जल्द एक ऐतिहासिक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
धरने में शामिल प्रमुख चेहरे:
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन में रविंद्र सिंह बंटू बघेल, कुलदीप सिंह, सोमवीर, धर्मेंद्र सिंह, संजीव सेठ, चेतन स्वरूप रावत, सलीम खान, महेश कुमार, निरितम सिंह, सत्यवीर पाठक, सीपी पाठक, गुड्डू, अशोक कुमार, गोपाल सिंह, पदम कुमार, जयप्रकाश, जगदीश, वेदों पंडित, धर्मवीर, रहेशाम, चित्र सिंह, नागेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार, रविंद्र सिंह किरशगोपाल, हरेंद्र कुमार, श्रीभगवान शर्मा, विष्णु सिंह, हरिप्रसाद, भगवान सिंह, श्यामसुंदर, पप्पू सिंह, विजय रावत, हरेंद्र तोमर, सत्य नारायण और सोनू समेत सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के किसान एकजुट रहे।
फिलहाल अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना धरना स्थगित किया है, लेकिन सबकी नजरें अब 19 मई की महाबैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।


