पूर्व कैबिनेट मंत्री ने प्रशासन से की अपील: ‘कब्जा मुक्त 2825 तालाबों को मिले नवजीवन’
भूजल स्तर बचाने के लिए मनरेगा और वित्त आयोग की निधि का सदुपयोग जरूरी
आगरा। भीषण गर्मी के बीच गिरता भूजल स्तर और सूखते तालाब चिंता का विषय बन चुके हैं। भूगर्भ जल का बेतहाशा दोहन और जल संचयन के प्रति जागरूकता के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसी संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता राजा अरिदमन सिंह ने भदावर हाउस से एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है। उन्होंने प्रशासन से आगरा के 2825 कब्जा मुक्त तालाबों का त्वरित जीर्णोद्धार कराने का आग्रह किया है।
डार्क जोन बने ब्लॉकों को बचाने का अंतिम मौका
पूर्व मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जिले में 2825 ऐसे तालाब हैं, जिन पर कोई अतिक्रमण नहीं है। यदि समय रहते मनरेगा एवं 13वें, 14वें व 15वें वित्त आयोग की धनराशि का सही उपयोग कर इन्हें पुनर्जीवित किया जाता, तो जिले के 14 में से 12 ‘डार्क जोन’ वाले ब्लॉकों को बचाया जा सकता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन यदि अब भी सक्रिय हो जाए, तो जल संकट की भयावहता को कम किया जा सकता है।
अधूरी योजनाओं पर सवाल, स्थलीय निरीक्षण की मांग
राजा अरिदमन सिंह ने कहा कि वह पिछले सात-आठ वर्षों से लगातार जिला प्रशासन को इन तालाबों की सूची सौंप रहे हैं, लेकिन धरातल पर काम संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा, “बाह विधानसभा क्षेत्र में मुझे कई तालाब केवल खोदे हुए और सूखे नजर आते हैं। वहां से निकाली गई मिट्टी और पेड़ों की सूखी लकड़ियां बदइंतजामी का प्रमाण दे रही हैं।”
उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) से आग्रह किया कि वे स्वयं डेरक तालाब, नौहगाँव और बटेश्वर-कचौरा रोड स्थित तालाबों का स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालाबों की खुदाई के दौरान ढाल का सही होना अत्यंत आवश्यक है ताकि जल संचय हो सके, अन्यथा सरकारी धन की बर्बादी ही होगी। उन्होंने आरईएस (RES) के इंजीनियरों की देखरेख में कार्य कराने पर जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर जोर
पूर्व मंत्री ने पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता जताते हुए तालाबों के चारों ओर आम, जामुन, गूलर, पीपल, बकैन और महुआ जैसे स्थानीय छायादार वृक्ष लगाने का सुझाव दोहराया। साथ ही, उन्होंने प्राइमरी स्कूलों में स्थापित ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ की जर्जर स्थिति पर भी संज्ञान लिया और उनके जीर्णोद्धार की मांग की, ताकि वर्षा के जल को सहेजकर भूगर्भ जल को फिर से रिचार्ज किया जा सके।


