मिट्टी खोदने गए थे साथ, पत्नी की संदिग्ध मौत, सुसाइड नोट में यह कलंक लेकर नहीं जी सकता… लिख पति ने फंदे पर लटक कर दी जान

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बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बिलौली गांव में शनिवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने हर किसी की आंखों में आंसू ला दिए। महज कुछ ही घंटों के अंतराल में एक सुखी परिवार पूरी तरह बिखर गया। तालाब से मिट्टी निकालने गए पति-पत्नी में से पहले पत्नी की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई, और फिर हत्या के झूठे आरोपों से आहत होकर दिव्यांग पति ने खुदकुशी कर ली।

​मृतक कुलदीप चौहान (30), जो पेशे से बिजली मिस्त्री था और एक पैर से दिव्यांग था, अपनी पत्नी निशा (27) के साथ घर की छत की मरम्मत के लिए मिट्टी लेने तालाब गया था। दोपहर के समय जब कुलदीप मिट्टी ढोने के लिए ठेलिया लेने गांव गया और वापस लौटा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। निशा तालाब के किनारे बेसुध पड़ी थी। कुलदीप उसे डॉक्टर के पास ले गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी निशा की मौत हो चुकी थी।

आरोपों की आग में जला सम्मान:

निशा का शव घर पहुँचते ही मातम की जगह हंगामे ने ले ली। सूचना पाकर पहुँचे निशा के मायके वालों ने कुलदीप पर हत्या का संगीन आरोप मढ़ दिया। गांव वालों के सामने अपमानित होने और ‘कातिल’ का ठप्पा लगने से कुलदीप टूट गया। वह भीड़ से चुपचाप निकला और अपने नए मकान में जाकर फांसी के फंदे पर झूल गया।

सुसाइड नोट में छलका दर्द:

मरने से पहले कुलदीप ने एक भावुक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसकी बेगुनाही और बेबसी साफ झलक रही थी। उसने लिखा “मेरी कोई गलती नहीं है, मैं यह कलंक लेकर नहीं जी सकता। मां और भाई, मेरे बेटे का ख्याल रखना।” उसने अपनी मां से माफी मांगते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया। इस दोहरी मौत के बाद 10 महीने का नन्हा बालगोविंद अब अनाथ हो चुका है।

पुलिसिया कार्रवाई:

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा। निशा के भाई की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है और दोनों ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही निशा की मौत की असली वजह साफ हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी जांच की जाएगी। फिलहाल पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।