लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उपजे विवादों के बीच, ट्रस्ट अब नए और कुशल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में, ट्रस्ट ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद के लिए देशभर से योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस बीच, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा इस पद के लिए किया गया आवेदन सियासी और प्रशासनिक गलियारों में व्यापक चर्चा का केंद्र बन गया है।
संगठनात्मक बदलाव का दौर
हाल ही में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई जिम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा पद छोड़े जाने के बाद, राम मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। ट्रस्ट अब एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जो पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी हो। इसी उद्देश्य से सीईओ के पद के लिए आवेदन मांगे गए हैं ताकि मंदिर प्रबंधन को नई ऊर्जा और नई दृष्टि मिल सके।
अमिताभ ठाकुर का आवेदन बना चर्चा का केंद्र
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर का इस पद के लिए आवेदन करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अपनी प्रशासनिक कार्यक्षमता और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले ठाकुर का इस दौड़ में शामिल होना यह दर्शाता है कि ट्रस्ट एक सख्त और अनुभवी प्रशासक की तलाश में है। उनके आवेदन के बाद से ही मंदिर प्रबंधन से जुड़े विभिन्न हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
संत समाज और भक्तों की टिकी निगाहें
राम मंदिर प्रशासन में होने वाले इन बड़े बदलावों पर न केवल संत समाज, बल्कि दुनियाभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं। ट्रस्ट अब चयन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है और जल्द ही किसी योग्य नाम पर अंतिम मुहर लगाने की संभावना है। यह नियुक्त केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि भविष्य में राम मंदिर की व्यवस्था और उसकी पवित्रता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नए सीईओ का चयन मंदिर की सुरक्षा, चढ़ावे के प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रस्ट इस प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी किसे सौंपता है।


