अगर जेन-जी विरोध कर रही है तो वे देश-विरोधी नहीं, हमारे अपने हैं: मुंबई में IIMUN कार्यक्रम में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

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मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और ‘जेन-अल्फा’ (Gen-Alpha) के साथ एक घंटे तक चले विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान युवाओं की सोच, उनके विरोध प्रदर्शन और देश के तमाम ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे।

मुंबई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ यानी IIMUN की 15वीं वर्षगांठ के इस भव्य कार्यक्रम में 11 से 19 साल की उम्र के करीब 2,000 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आज की युवा पीढ़ी या जेन-जी किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है, तो उन्हें ‘देश-विरोधी’ (Anti-National) करार देना बिल्कुल गलत है, क्योंकि वे हमारे ही अपने लोग और देश की अगली पीढ़ी हैं।

आंदोलन संवाद का ही एक माध्यम है

छात्रों के प्रदर्शन और सरकार के साथ संवाद पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी आम सहमति बनाने का ही एक तरीका है। जब अलग-अलग वजहों से आवाज नहीं सुनी जाती और बातचीत का रास्ता बंद हो जाता है, तब आंदोलन की स्थिति बनती है।

उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते युवाओं की बात सुन ली होती, तो जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले आंदोलनों की नौबत ही नहीं आती। आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम (व्यवस्था) में सुधार के लिए होना चाहिए।

पुरानी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त है नई पीढ़ी

​जेन-जी की मानसिकता की सराहना करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि जब हम लोग उनकी उम्र के हुआ करते थे, तो बड़े जो कह देते थे, हम आंख मूंदकर मान लेते थे और कभी सवाल नहीं उठाते थे। इसके विपरीत, आज की जेन-जी और जेन-अल्फा हर बात पर तार्किक सवाल पूछती है, जिन्हें तार्किक जवाब और थोड़े स्नेह की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि मुझे आंख मूंदकर किसी पर भरोसा करना हो, तो मैं नई पीढ़ी पर कर सकता हूं, क्योंकि वे मौजूदा पीढ़ी से कहीं अधिक ईमानदार और देशभक्त हैं।

कार्यक्रम के दौरान सामने आए 10 प्रमुख बिंदु:

सरकार की भूल पर: आंदोलन तब जन्म लेता है, जब आपसी संवाद पूरी तरह नाकाम हो जाता है। अगर सरकार ने पहले ही युवाओं से बात कर ली होती, तो आंदोलन की जरूरत ही नहीं पड़ती।

जेन-जी की सोच पर: आज की युवा पीढ़ी बड़ों की बात बिना सोचे-समझे स्वीकार नहीं करती, बल्कि हर बात पर सवाल खड़े कर अपने लिए तार्किक उत्तर तलाशती है।

अधिकार और प्रदर्शन पर: संविधान ने नागरिकों को विरोध जताने का अधिकार दिया है, लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि प्रदर्शन करने के सही और अनुशासित तरीके क्या हैं।

विरोध की वजह: अगर युवा पीढ़ी सड़क पर उतरकर आवाज उठा रही है, तो इसका मतलब है कि उन्हें कोई वास्तविक तकलीफ है। यह विरोध किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम सुधारने के लिए है।

​देश-विरोधी होने के आरोप पर: आंदोलन करने वाले युवा कभी एंटी-नेशनल नहीं हो सकते। वे हमारे अपने बच्चे और देश का भविष्य हैं, जिनकी बात सुनना और समझना बेहद जरूरी है।

जंतर-मंतर की घटनाओं पर: पुलिसिया कार्रवाई या लाठीचार्ज के पीछे के कारणों की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि व्यवस्था में कहां और क्या गड़बड़ी हुई है।

शिक्षा व्यवस्था पर: शिक्षा कभी भी कोई व्यावसायिक (कमर्शियल) बिजनेस नहीं हो सकती। इसका इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए कि यह हर नागरिक को आसानी से सुलभ हो सके।

​पड़ोसी देशों से संबंध पर: युद्ध के समय हमें अपनी सरकार का पूरा साथ देना चाहिए, लेकिन जब संघर्ष थमे तो बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रखने चाहिए क्योंकि युद्ध कभी भी स्थायी समाधान नहीं होता।

​सेम-सेक्स मैरिज पर: समाज की स्थापित और पारंपरिक व्यवस्था को अचानक छेड़ना ठीक नहीं है। अगर कोई नया सिस्टम लाना है, तो उसके लिए पहले पूरे समाज को मानसिक रूप से तैयार करना होगा।

​महिलाओं के नेतृत्व पर: केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह तय है कि महिलाओं को आगे आना चाहिए और उन्हें समाज में बराबरी के अधिकार मिलने चाहिए।

आरएसएस चीफ ने कहा, ‘हम सभी पहलुओं को देखते हैं और हर किसी का अपना नजरिया होता है। हमें बहुत सारे विचार और विरोधी विचार मिलते हैं, जो मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर बनाते हैं। ऐसा जरूर होना चाहिए। मैं यह नहीं कहूंगा कि जेन जी को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं। संविधान बनाने वालों ने, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के भाषणों में, इस बारे में संकेत दिए हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’

उन्होंने कहा, ‘जेन जी विरोध करने के लिए आवाज नहीं उठा रही है, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कुछ दिक्कतें हैं, जिसे ठीक किया जाना चाहिए। आंदोलन मेरे या आपके खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को ठीक करने के लिए होना चाहिए।’