नई दिल्ली/पणजी: बहुचर्चित 2013 के यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म मामले में ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच से बहुत बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (सेशन कोर्ट) के बरी करने के फैसले को पूरी तरह से पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है और उन्हें 10 साल की कठोर कारावास (सजा) के साथ-साथ 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।
इस मामले में गोवा पुलिस की जांच अधिकारी रहीं सुनीता सावंत ने जानकारी दी कि कोर्ट ने उन्हें आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई है।
अदालत द्वारा सुनाई गई सजा का विवरण:
IPC की धारा 376(2)(F) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना, आईपीसी की धारा 376(2)(के) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना। आईपीसी की धारा 354 के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना, आईपीसी की धारा 354ए के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और जुर्माना, आईपीसी की धारा 354B के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास।
फैसले पर तरुण तेजपाल की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस निर्णय से काफी निराश हैं और इसके खिलाफ निश्चित रूप से सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘राजनीतिक बदले की भावना और ‘तहलका’ के पुराने कामकाज की वजह से लोग मेरे पीछे पड़े हैं। हमने ट्रायल कोर्ट में साढ़े सात साल तक निष्पक्ष केस लड़ा और बरी हुए। जो लोग सत्ता के साथ हैं, वे बरी हो जाते हैं, लेकिन वे उन लोगों के पीछे हाथ धोकर पड़ते हैं जिन्होंने कभी उनके खिलाफ सच लिखा था।’ उन्होंने आगे कहा कि वह देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और अपने सारे सबूत सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी टिप्पणी की कि यह घटना लगभग 13 साल पुरानी है और इस लंबी अवधि के दौरान आरोपी के खिलाफ किसी अन्य प्रकार के दुराचार का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, साथ ही दोनों पक्ष अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम नवंबर 2013 का है, जब गोवा में एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ (ThinkFest) कार्यक्रम के दौरान तहलका की एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर लिफ्ट के भीतर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में निचली अदालत (मापुसा सत्र न्यायालय) ने मई 2021 में साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। उस फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब हाईकोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।


