आगरा पुलिस में 24 घंटे के भीतर रिश्वतखोरी से जुड़े दो बड़े मामलों में कार्रवाई हुई है। पहले कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक नागेंद्र सिंह से जमीन कब्जे के मुकदमे में नाम हटाने के बदले 20 लाख रुपये मांगने के आरोप में एसआई मानवेंद्र गंगवार को निलंबित किया गया। इसके बाद अछनेरा थाने के एसएसआई जितेंद्र यादव का कथित पैसों के लेन-देन और डायरी में हिसाब-किताब से जुड़ा वीडियो वायरल हुआ, जिस पर डीसीपी पश्चिमी आदित्य कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें भी निलंबित कर दिया। लगातार दो निलंबनों ने आगरा पुलिस में भ्रष्टाचार, दलाल तंत्र और थानों में वसूली के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगरा पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिल रही है। 24 घंटे के भीतर पुलिसकर्मियों की रिश्वतखोरी से जुड़ी दूसरी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पहले कारगिल युद्ध लड़ चुके पूर्व सैनिक से 20 लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में एसआई मानवेंद्र गंगवार को निलंबित किया गया, और अब अछनेरा थाने में तैनात एसएसआई जितेंद्र यादव पर रिश्वतखोरी और लेन-देन के गंभीर आरोपों के बाद उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है।
दोनों मामलों में सामने आए वीडियो ने न सिर्फ पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि थानों में दलाल तंत्र, राजीनामा वसूली और संरक्षण के बदले पैसों का खेल किस हद तक सक्रिय है। हालांकि, लगातार सामने आ रहे मामलों पर डीसीपी स्तर से सख्त कार्रवाई ने यह संकेत भी दिया है कि अब भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की बजाय सीधा दंडात्मक एक्शन लिया जा रहा है।
अछनेरा थाने में ‘डायरी’ वाला खेल
अछनेरा थाना क्षेत्र में तैनात एसएसआई जितेंद्र यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन पर पैसों के लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एसएसआई डायरी में पैसों का हिसाब-किताब दर्ज करते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में सनसनी फैल गई।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि दो वर्षों की तैनाती के दौरान थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को संरक्षण, दलालों के जरिए सेटिंग, और राजीनामा कराने के नाम पर वसूली जैसी गतिविधियां चल रही थीं। आरोप यह भी है कि थाना प्रभारी की गैरमौजूदगी में कई संवेदनशील मामलों में लेन-देन का खेल सक्रिय रहता था, जिससे पुलिस की छवि गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
वीडियो वायरल होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी पश्चिमी आदित्य कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया और एसएसआई जितेंद्र यादव को निलंबित कर दिया। विभागीय स्तर पर आगे जांच की तैयारी भी तेज कर दी गई है।
मामला 2: कारगिल योद्धा से 20 लाख की ‘डील’
अछनेरा के एसएसआई पर कार्रवाई से ठीक पहले आगरा पुलिस के सामने एक और शर्मनाक मामला आया था। कारगिल युद्ध लड़ चुके पूर्व सैनिक नागेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि एक जमीन कब्जा प्रकरण में चार लोगों के नाम मुकदमे से हटाने के लिए एसआई मानवेंद्र गंगवार ने 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
पूर्व सैनिक ने इस मामले की शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर से की थी और साथ ही रुपयों की मांग से जुड़ा वीडियो साक्ष्य भी सौंपा था। वायरल वीडियो में कथित तौर पर एसआई पैसे की मांग करते हुए और ऊपर तक दबाव व गाली-गलौज की बात करते सुनाई दे रहा था। इस शिकायत और साक्ष्यों के आधार पर एसआई मानवेंद्र गंगवार को निलंबित कर दिया गया।
अब 24 घंटे के भीतर दूसरा वीडियो सामने आने से यह साफ हो गया है कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि थाना स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने की आशंका को बल मिल रहा है।
24 घंटे में दो निलंबन
लगातार दो मामलों में पुलिसकर्मियों के निलंबन से यह तो स्पष्ट है कि आगरा पुलिस नेतृत्व भ्रष्टाचार के आरोपों को हल्के में नहीं ले रहा, लेकिन साथ ही बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ निलंबन से थानों में जमे भ्रष्ट नेटवर्क खत्म होंगे? दोनों मामलों में जो पैटर्न सामने आया है, वह बेहद गंभीर है।
मुकदमों में नाम हटाने के बदले रिश्वत की मांग। राजीनामा कराने के नाम पर वसूली। दलालों की सक्रिय भूमिका, अवैध गतिविधियों को कथित संरक्षण और थाना स्तर पर अनौपचारिक लेन-देन तंत्र, यदि इन आरोपों की निष्पक्ष और गहराई से जांच होती है, तो संभव है कि केवल दो पुलिसकर्मियों तक सीमित मामला न रहकर पूरा नेटवर्क बेनकाब हो। यही वजह है कि अब आम जनता की नजर केवल निलंबन पर नहीं, बल्कि एफआईआर, विभागीय जांच, संपत्ति व कॉल डिटेल जांच और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही पर भी है।
दलाल तंत्र और ‘वसूली नेटवर्क’ पर सवाल
आगरा में 24 घंटे के भीतर रिश्वतखोरी से जुड़े दो मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया अब पुलिस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा खुलासा मंच बनता जा रहा है। पहले जहां ऐसे मामलों की शिकायतें दब जाती थीं, वहीं अब वीडियो सामने आते ही विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ रही है। यह कार्रवाई जनता के लिए राहत भरी जरूर है, लेकिन उतनी ही चिंताजनक भी, क्योंकि सवाल उठता है कि क्या ऐसे लेन-देन पहले से चल रहे थे?क्या दलाल तंत्र बिना संरक्षण के सक्रिय रह सकता है? क्या थाना प्रभारी स्तर पर निगरानी कमजोर है? क्या केवल निलंबन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
अगर पुलिस नेतृत्व वास्तव में सख्त है, तो इन दोनों मामलों को उदाहरण बनाकर व्यापक सफाई अभियान चलाना होगा, ताकि थानों में बैठा रिश्वत तंत्र जड़ से खत्म हो सके।

