आगरा मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के हॉस्टल में एमडी छात्रा वर्तिका सिंह की मौत बनी पहेली, फोन, चैट और वीडियो खंगाल रही पुलिस

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आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय (Mental Health Institute and Hospital) के हॉस्टल में एमडी प्रथम वर्ष की छात्रा वर्तिका सिंह (28) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पुलिस की उलझन बढ़ा दी है। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया, लेकिन मौत की ठोस वजह स्पष्ट न होने के कारण विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। इसे अब विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाएगा।

पहले छात्रा के नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या की आशंका जाहिर की गई थी। सोमवार को वर्तिका की मां अनीता आगरा पहुंचीं। इकलौती बेटी की मौत से वह सदमे में हैं। पोस्टमार्टम हाउस में उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के बाद बेटी के लिए आवाज उठाएंगी। पुलिस भी शिकायत मिलने का इंतजार कर रही है।

बता दें कि वर्तिका सिंह मूलरूप से आजमगढ़ के पोस्ट सदर सिंचारी की रहने वाली थीं। पिता रामदरश सिंह रिटायर्ड आईआरएस हैं। भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, अमेरिका में रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, मां अनीता ने बताया कि पति अलग रहते हैं। अनीता अपनी दिल्ली निवासी बहन आराधना सिंह के साथ आई थीं। हरीपर्वत पुलिस ने उन्हें बेटी का चेहरा दिखाया। वह फूट-फूटकर रोने लगीं। इसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई।

हरीपर्वत पुलिस की पूछताछ में परिजन से पता चला कि वर्तिका सिंह ने वर्ष 2022 में ओडिशा के बरहामपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। फरवरी 2026 में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में एमडी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। वह होनहार थीं। वह आगरा के कॉलेज में पढ़ाई नहीं करना चाहती थीं। मगर आगरा में प्रवेश मिलने के बाद पढ़ाई में लग गई। वह पढ़ाई के दौरान ही अवसाद का शिकार हो गई थीं।

इस कारण दिल्ली के डॉक्टर से उपचार कराया गया। 26 मार्च को वर्तिका ने नींद की दवा की ओवरडोज ले ली थी। 27 मार्च से 21 अप्रैल तक वर्तिका अपने घर में ही रही। उसका उपचार चिकित्सक से कराया गया। स्थिति में सुधार होने के बाद मां ने कॉलेज भेजा था। मां ने बताया कि शनिवार रात बेटी से बात की थी। काफी देर बातचीत में ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे यह लगे कि वह आत्महत्या कर लेगी।

मां ने बताया कि रविवार सुबह वह बेटी को फोन कर रही थीं। मगर फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्हें लगा कि पढ़ाई में व्यस्त होगी। दोपहर तक जवाब नहीं आने पर चिंता हुई। उन्होंने बैचमेट सिद्धार्थ शर्मा को फोन किया। वह अपनी सहपाठी शिखा ठाकुर और डॉ. सना रब्बानी के साथ वर्तिका के कमरे पर गए। दरवाजा अंदर से बंद था। धक्का देकर दरवाजा खोला गया, तब वर्तिका पलंग पर पड़ी मिलीं। उन्हें अस्पताल ले गए, जहां मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने तीनों बैचमेंट से पूछताछ की है।

छात्रा के शव का दो डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने से विसरा सुरक्षित रखा गया है। वहीं मौत का समय भी 48 घंटे पहले होने का अनुमान है। पोस्टमार्टम सोमवार शाम तकरीबन 4 बजे हुआ. शव रविवार शाम 5:28 बजे हॉस्टल के कमरे में मिला था। वर्तिका सुबह से फोन नहीं उठा रही थीं। इससे आशंका है कि शनिवार रात को ही मौत हुई होगी। वर्तिका के कमरे को सील किया गया है।

डीसीपी ने बताया कि परिजन की शिकायत मिलने पर उसे जांच में शामिल किया जाएगा। पूर्व में छात्रा ने सीनियर रेजिडेंट पर गंभीर आरोप लगाए थे। कमेटी की जांच में आरोप सिद्ध नहीं हुए थे। इस पूरे मामले को भी देखा जाएगा। छात्रा की मौत के पीछे यह मामला तो नहीं है. इसकी तह तक पुलिस जाएगी। कमेटी के लोगों से बात की जाएगी। वर्तिका के मोबाइल की जांच होगी। देखा जाएगा कि छात्रा ने कोई वीडियो तो नहीं बनाया। व्हाट्सएप पर किसी से बात तो नहीं हुई। कॉल डिटेल भी निकाली जाएगी। मोबाइल को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि फरवरी में छात्रा ने गाजियाबाद के रहने वाले सीनियर रेजिडेंट डॉ. सार्थक पर अभद्रता का आरोप लगाया था। दोनों फरवरी में साथ में कहीं गए थे। इसके बाद छात्रा ने शिकायत की थी। मामले में तीन डॉक्टरों की कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने बयान दर्ज किए थे। जांच में अभद्रता के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी। इसमें आरोप साबित नहीं हुए थे। वर्तिका तब से तनाव में थी। 27 मार्च को भी जान देने का प्रयास किया था। तब नींद की गोलियों की ओवरडोज ले ली थी। अस्पताल में हालत में सुधार हुआ था। उसे परिजन लेकर चले गए थे। तीन दिन पहले फिर से आई थी। उसका मनोचिकित्सक से उपचार भी चल रहा था। उसे आत्महत्या संबंधी विचार भी आया करते थे। इसलिए परिजन उसका ख्याल रख रहे थे।

पुलिस ने छात्रा के कमरे की जांच के लिए फील्ड यूनिट की टीम को बुलाया था। टीम ने कमरे से बेड पर डेटॉल की खाली शीशी बरामद की। मोबाइल भी बेड पर रखा मिला। कमरे में बीयर की केन के साथ सिगरेट की डिब्बी मिली है। यह किसकी है, पता नहीं चल सका है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। सामान अस्त-व्यस्त रखा था। पुलिस ने नींद की गोलियां भी देखने का प्रयास किया। मगर ऐसा कुछ नहीं पता चला कि गोलियां रखी हों।

निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है, जिसमें डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. चंचल चंद्रा और डॉ सुमित्रा मिश्रा शामिल हैं। कमेटी पूरे प्रकरण की जांच करेगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।