पुरुषोत्तम मास में भक्ति के रंग में डूबी ताजनगरी: कहीं 251 जोड़ों का महा रुद्राभिषेक, तो कहीं 551 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा

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आगरा: पावन पुरुषोत्तम अधिक मास के शुभ अवसर पर इन दिनों आगरा और उसके आसपास के तमाम क्षेत्रों में एक साथ कई अलौकिक धार्मिक आयोजनों की अविरल धारा बह रही है। इन भव्य उत्सवों ने समूची ताजनगरी को भक्ति, सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं की दिव्य ऊर्जा से पूरी तरह सराबोर कर दिया है। शहर के अलग-अलग कोनों में कहीं कलश यात्रा की अभूतपूर्व भव्यता देखने को मिल रही है, तो कहीं श्रीमद्भागवत कथा का अमृत प्रवाह भक्तों को निहाल कर रहा है। कहीं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महादेव का रुद्राभिषेक हो रहा है, तो कहीं पुष्टिमार्गीय मंदिरों में आराध्य ठाकुरजी के दिव्य मनोरथ दर्शन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। इन सभी आयोजनों के सुंदर संगम ने मिलकर इस समय आगरा को एक जीवंत आध्यात्मिक तीर्थ क्षेत्र के रूप में परिवर्तित कर दिया है।

लोहामंडी में 251 जोड़ों का महा रुद्राभिषेक, तीन घंटे तक गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’

​आगरा के लोहामंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में ‘शिव परिवार संस्था’ द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन एक बेहद दिव्य और आलौकिक दृश्य देखने को मिला। यहाँ आयोजित भव्य सामूहिक रुद्राभिषेक अनुष्ठान में एक साथ 251 भाग्यशाली जोड़ों ने मुख्य यजमान छोटेलाल बंसल एवं कांता बंसल के नेतृत्व में सहभागिता की। सभी जोड़ों ने पवित्र नर्मदेश्वर शिवलिंगों पर लगातार तीन घंटे तक दुग्ध, गंगाजल और विभिन्न पवित्र औषधियों से अभिषेक किया।

​इस महा-अनुष्ठान को 11 प्रकांड विद्वान ब्राह्मणों ने पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न कराया, जिससे पूरा परिसर ‘ॐ नमः शिवाय’ और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इसके बाद आयोजित कथा सत्र में व्यासपीठ से प्रख्यात कथाव्यास मृदुलकांत शास्त्री ने माता सती जन्म, नारद मोह और कुबेर चरित्र का अत्यंत मार्मिक व ज्ञानवर्धक वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान बंसल दंपत्ति ने कहा कि शिव की आराधना मनुष्य के जीवन को संयम, सदाचार और धर्म के सच्चे मार्ग पर ले जाती है।

जयपुर हाउस–प्रताप नगर में 551 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा; केदारनाथ झांकी और विंटेज कार बनी आकर्षण

पुरुषोत्तम मास की पावन शुरुआत के उपलक्ष्य में जयपुर हाउस एवं प्रताप नगर क्षेत्र में ‘श्री बुर्जीवाला मंदिर संचालन समिति’ द्वारा एक ऐतिहासिक व भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस मंगल यात्रा में पीतवस्त्र (पीले कपड़े) धारण किए हुए 551 महिलाओं ने अत्यंत अनुशासित रूप से अपने सिर पर मंगल कलश धारण कर सहभागिता की। इस भव्य कलश यात्रा का विधिवत शुभारम्भ क्षेत्र के प्रसिद्ध चिन्ताहरण मंदिर से हुआ, जहाँ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रामशंकर कठेरिया एवं धर्माचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने वैदिक पूजन कर यात्रा को आगे रवाना किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान गौरव बंसल एवं निधि बंसल रहे।

​इस शोभायात्रा में विघ्नहर्ता भगवान गणेश, राधा-कृष्ण, अनन्य सखा बांके बिहारी, शिव परिवार और भव्य राम दरबार की मनोहारी झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। इसके अतिरिक्त, विशेष रूप से तैयार की गई बाबा केदारनाथ धाम की अलौकिक झांकी और एक रॉयल विंटेज कार को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया। ‘सुधीर बैंड’ द्वारा बिखेरी जा रही मधुर भक्ति धुनों पर श्रद्धालु पूरे रास्ते झूमते और नृत्य करते नजर आए।

​इसी क्रम में जयपुर हाउस स्थित श्री बुर्जीवाला मंदिर में पुरुषोत्तम अधिक मास के पावन अवसर पर सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शंखनाद हुआ। कथा व्यास आचार्य पंडित राजेश शास्त्री महाराज ने प्रथम दिन भागवत महात्म्य कथा, पूज्य शुकदेव प्रसंग और महाराज परीक्षित के जन्म का विस्तार से वृत्तांत सुनाया।

उन्होंने व्यासपीठ से कहा कि श्रीमद्भागवत कोई सामान्य ग्रंथ नहीं, बल्कि भटकते हुए मानव जीवन को सही दिशा देने वाली अमर अमृत कथा है, जो मनुष्य को सीधे धर्म, निष्काम भक्ति और सत्य के मार्ग पर अग्रसर करती है। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस की गंगा में डुबकियां लगाते रहे। इस अवसर पर गौरव बंसल, निधि बंसल सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह कथा प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक अनवरत रूप से आयोजित की जा रही है।

यमुना तट पर दिव्य कथा मंडपम, हरिनाम संकीर्तन और वैदिक अनुष्ठान से भक्तिमय हुआ वातावरण

उधर, यमुना किनारे ताज व्यू गार्डन फेस-1 पार्किंग क्षेत्र में ‘श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ’ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ अपनी दिव्यता की छटा बिखेर रहा है। यहाँ मुख्य कथा मंडपम को ब्रज की थीम पर बेहद अलौकिक रूप से सजाया गया है, जहाँ साक्षात श्रीनाथजी के दिव्य स्वरूप और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की सुंदर स्थापना ने श्रद्धालुओं को आगरा की धरती पर ही साक्षात पावन ब्रजधाम की अद्भुत अनुभूति करा दी है।

इस कथा का शुभारम्भ भगवान गणेश के तैलचित्र पर पूजन-अर्चन और 11 भूदेवों (ब्राह्मणों) के मांगलिक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास श्री महंत योगेश पुरी ने पुरुषोत्तम मास की आध्यात्मिक महत्ता, निस्वार्थ दान, अनन्य भक्ति और आत्मज्ञान के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने भक्तों को मार्गदर्शित करते हुए कहा कि “हमारे पवित्र शास्त्र ही वास्तव में सनातन धर्म का असली संविधान हैं” और इस परम कथा के श्रवण का पूर्ण पुण्य लाभ उठाने के लिए मन और शरीर दोनों की आंतरिक व बाह्य शुद्धता होना अनिवार्य है। इस धार्मिक उत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन शाम को मां यमुना की भव्य महाआरती का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।

​इस्कॉन आगरा कथा में परीक्षित जन्म प्रसंग, हरे कृष्ण संकीर्तन से गूंजा सूर्य नगर

​शहर के सूर्य नगर स्थित समाधि पार्क में ‘इस्कॉन आगरा’ (ISKCON) एवं ‘राधा सखी ग्रुप’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दूसरे दिन भक्ति का एक अद्भुत और अकल्पनीय नजारा देखने को मिला। इस भव्य कथा का शुभारम्भ और समापन इस्कॉन के पारंपरिक ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ के सामूहिक संकीर्तन के साथ हुआ, जिसकी दिव्य ध्वनि से पूरा सूर्य नगर क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

कथा व्यास सार्वभौम प्रभु ने द्वितीय दिवस की कथा में महाराज परीक्षित के जन्म की कथा, कलयुग पर उनकी विजय और उन्हें मिले ऋषि कुमार के श्राप प्रसंग का बड़े ही मार्मिक ढंग से विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल राजा-महाराजाओं की कथा मात्र नहीं है, बल्कि यह मानव मात्र के लिए जीवन का सर्वोच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शन है, जो जीवात्मा का सीधे परमात्मा श्रीकृष्ण से मिलन कराता है। इस दौरान पंडाल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु करतल ध्वनि के साथ भक्ति रस में डूबे नजर आए।

पुष्टिमार्गीय व अन्य मंदिरों में बगीचा और रथयात्रा मनोरथ, ठाकुरजी के दिव्य दर्शन से भक्त मंत्रमुग्ध

​पुरुषोत्तम मास के चलते आगरा के पुष्टिमार्गीय मंदिरों में भी प्रभु की अनूठी लीलाओं के दर्शन कराए जा रहे हैं। यमुना किनारा स्थित प्राचीन ‘श्री मथुराधीश मंदिर’ में ठाकुरजी को अलौकिक “बगीचा स्वरूप” में बड़े ही लाड़-चाव से सजाया गया, जिससे पूरा गर्भगृह और मंदिर परिसर हरी-भरी हरियाली और सुगन्धित पुष्पों के कारण एक दिव्य उपवन में तब्दील हो गया।

यमुना सेवक बृज खंडेलवाल जी एवं मंदिर के महन्त नन्दन श्रोत्रिय ने इस परंपरा की जानकारी देते हुए बताया कि पुष्टिमार्ग में ‘बगीचा उत्सव’ अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और प्रकृति-रस के साथ मनाया जाने वाला एक अनूठा उत्सव है। यह पवित्र उत्सव साक्षात ठाकुरजी की बाल-लीलाओं, उनके निकुंज-विहार और पावन ब्रज की सुंदर प्राकृतिक छटा का सजीव प्रतीक है। इस दौरान ठाकुरजी को सुंदर मोर-मुकुट, असली मोर-पंखों से सुसज्जित आभूषण और प्रकृति-प्रधान दिव्य शृंगार धारण कराया गया, जिसे देखकर भक्तों को ऐसा आभास हो रहा था मानो साक्षात श्रीकृष्ण ब्रज के कुंज-वन और यमुना तट पर सखियों संग विहार कर रहे हों।

मंदिर की सांध्य बेला की विशेष यमुना आरती महन्त जुगल श्रोत्रिय द्वारा संपन्न की गई। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से गिरिराज किशोर सादानी, रतन सादानी, रोहित सादानी, आव्या श्रोत्रिय, ओजस्वी भारद्वाज, मनीष भारद्वाज, राघव, अथर्व, अभिनव, अपाला, राकेश शर्मा सहित तमाम वैष्णव भक्त उपस्थित रहे।

​श्री प्रेमनिधि मंदिर में रथयात्रा मनोरथ दर्शन

​इसी श्रृंखला में, नाई की मंडी स्थित प्रसिद्ध ‘श्री प्रेमनिधि मंदिर’ में आराध्य श्री श्याम बिहारी जी महाराज के भव्य “रथयात्रा मनोरथ दर्शन” का आयोजन किया गया। इस व्रजभाव से सराबोर उत्सव के दौरान ठाकुरजी को एक बेहद सुंदर और कलात्मक रूप से सुसज्जित रथ में विराजमान कर भक्तों के दर्शनार्थ प्रस्तुत किया गया। इस विशेष मनोरथ के लिए संपूर्ण मंदिर परिसर को सुंदर पुष्प सज्जा, अलौकिक फूलों के बंदनवारों और सैकड़ों टिमटिमाते दीपों से अलंकृत किया गया था।

मंदिर के मुख्य सेवाधारी हरिमोहन गोस्वामी और सेवा अधिकारी सुनीत गोस्वामी ने इस लीला का आध्यात्मिक भाव समझाते हुए बताया कि ‘रथयात्रा मनोरथ’ में ठाकुरजी स्वयं रथ में सवार होकर अपने भक्तों को निहाल करने आते हैं, जो इस सुंदर भावना का प्रतीक है कि जगत के स्वामी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए स्वयं चलकर उनके समीप आते हैं।

मंदिर प्रशासक दिनेश पचौरी ने बताया कि आगामी 15 जून तक चलने वाले इस भव्य पुरुषोत्तम मास महोत्सव में प्रतिदिन ठाकुरजी के विभिन्न और मनोहारी मनोरथ आयोजित किए जाएंगे, जिसके तहत कल मंगलवार को “अक्षय तृतीया मनोरथ” के विशेष दर्शन भक्तों को कराए जाएंगे।