आगरा, 18 मई। राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए कथित बर्बर लाठीचार्ज और उनके वर्षों पुराने चैंबरों को जबरन तोड़े जाने की घटना के विरोध में सोमवार को ताजनगरी आगरा के वकीलों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। जिला न्यायालय से लेकर सदर तहसील तक के अधिवक्ताओं ने पुलिस और प्रशासनिक अमले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।
इस राष्ट्रव्यापी गुस्से के बीच सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित अधिवक्ता थाना न्यू आगरा के ठीक सामने मुख्य सड़क पर एकत्र हुए। वहां उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी करते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पुतला दहन किया।
प्रदर्शनकारी वकीलों का सीधा आरोप था कि लखनऊ में बेहद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे निहत्थे अधिवक्ताओं पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं। हद तो तब हो गई जब प्रशासनिक हठधर्मिता के चलते करीब 30 से 35 वर्ष पुराने अधिवक्ता चैंबरों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। समूचे अधिवक्ता समाज ने पुलिस की इस क्रूर कार्रवाई को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है।
इस दमनकारी नीति के विरोध स्वरूप सोमवार को आगरा जिला न्यायालय और सदर तहसील के वकीलों ने खुद को न्यायिक व प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह विरत रखा। वकीलों की इस सामूहिक हड़ताल के चलते अदालतों में चल रहे कई गंभीर और जरूरी मामलों की सुनवाई पूरी तरह प्रभावित रही। वहीं दूसरी ओर, सदर तहसील में होने वाले बैनामा, रजिस्ट्री, शपथ पत्र, विभिन्न प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य भी पूरी तरह ठप हो गए। नतीजतन, तपती धूप में दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और वे बिना काम कराए वापस लौटने को मजबूर हुए।
सदर तहसील बार एसोसिएशन की आपात बैठक
इस गंभीर मुद्दे को लेकर आगरा तहसील बार एसोसिएशन, सदर तहसील आगरा के तत्वावधान में एक आवश्यक महाबैठक बुलाई गई। बैठक में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने एक स्वर में लखनऊ की घटना की घोर निंदा की और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग उठाई।
अधिवक्ताओं ने दोटूक कहा कि तोड़े गए चैंबरों का सरकारी खर्च पर जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए और वकीलों की सुरक्षा के लिए ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके साथ ही सरकार को सख्त चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और उग्र करते हुए संपूर्ण प्रदेशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया जाएगा।
निबंधन कार्यालय पर वकीलों का जोरदार प्रदर्शन
तहसील परिसर में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के फौरन बाद सभी अधिवक्ता जुलूस की शक्ल में निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर) पहुंचे और वहां पहुंचकर तालाबंदी जैसी स्थिति पैदा करते हुए तीखा विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों के उग्र तेवरों को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। हालांकि, पुतला दहन और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के बाद अधिवक्ता वापस लौट गए।
बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ता समाज का आईना होते हैं और न्याय व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं। ऐसे में रक्षक ही जब भक्षक बन जाए तो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वकीलों ने साफ कर दिया कि खाकी की इस तानाशाही को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
बैठक में ये प्रमुख अधिवक्ता रहे मौजूद
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन और आपातकालीन बैठक में शहर के कई वरिष्ठ और नामचीन अधिवक्ता प्रमुख रूप से शामिल हुए। इनमें राजेन्द्र कुलश्रेष्ठ, अमरनाथ पाठक, लाल बहादुर राजपूत एडवोकेट, इन्द्रपाल सिंह एडवोकेट, प्रवीण कुमार गुप्ता, विजय कुमार कुलश्रेष्ठ, भगवान सिंह एडवोकेट, सुबोध कुमार शर्मा एडवोकेट, मानसिंह एडवोकेट, शिवनंदन शर्मा एडवोकेट, संजय एडवोकेट, रानु जैन, लखन कुमार एडवोकेट और ललित अग्रवाल एडवोकेट समेत भारी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
पूरी मुहिम का संचालन बार एसोसिएशन के चेयरमैन, अध्यक्ष और महामंत्री के नेतृत्व में एकजुटता के साथ किया गया।


