ऊर्जा क्षेत्र में ‘दादा’ की एंट्री: सौरव गांगुली बने जैकसन ग्रुप के ब्रांड एंबेसडर; सस्टेनेबल इंडिया के लिए मिलाया हाथ

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​नई दिल्ली: भारत की अग्रणी ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जैकसन ग्रुप (Jakson Group) ने अपनी ब्रांड पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और दिग्गज लीडर सौरव गांगुली को अपना पहला ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। आठ दशकों की विरासत वाला यह ग्रुप अब ‘दादा’ की कप्तानी में स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Green Energy) के अपने विजन को जन-जन तक पहुँचाएगा।

भरोसे और नेतृत्व का अनूठा संगम

जैकसन ग्रुप पिछले 80 वर्षों से नवाचार और भरोसे का प्रतीक रहा है। कंपनी का मानना है कि सौरव गांगुली की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टीम को लीड करने की क्षमता और उनकी विश्वसनीयता, जैकसन के ‘सस्टेनेबल सॉल्यूशंस’ के लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाती है। इस साझेदारी के तहत गांगुली कंपनी के प्रमुख अभियानों और स्वच्छ ऊर्जा पहलों का चेहरा होंगे।

​”दादा का स्वागत करना गर्व की बात”: समीर गुप्ता (चेयरमैन)

जैकसन ग्रुप के चेयरमैन समीर गुप्ता ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा, “हमें जैकसन परिवार में ‘दादा’ का स्वागत करते हुए गर्व है। सौरव गांगुली बेहतरीन प्रदर्शन और मजबूती के जीवंत उदाहरण हैं। हमें पूरा भरोसा है कि उनकी पहचान से हमारे ब्रांड को नई मजबूती मिलेगी और भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हमारे सस्टेनेबल सॉल्यूशंस को तेजी से अपनाया जाएगा।” उन्होंने ग्रुप की सफलता में वाइस चेयरमैन सुंदीप गुप्ता और ग्लोबल सीईओ (जैकसन ग्रीन) बिकेश ओगरा के साथ-साथ नई पीढ़ी के योगदान को भी रेखांकित किया।

​सौरव गांगुली ने जताया उत्साह

इस नई पारी की शुरुआत करते हुए सौरव गांगुली ने कहा, “जैकसन ग्रुप का दृष्टिकोण सोलर एनर्जी, ग्रीन फ्यूल और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर (मेट्रो, सिविल, पानी) जैसी पूरी वैल्यू चेन में फैला हुआ है। ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ना मेरे लिए खुशी की बात है, जो भारत के ऊर्जा बदलाव और एक स्वच्छ व हरित भविष्य की दिशा में ठोस योगदान दे रहा है।”

भविष्य की तैयारी: मैन्युफैक्चरिंग से प्रोजेक्ट डेवलपमेंट तक

​जैकसन ग्रुप का बिजनेस मॉडल अद्वितीय है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग से लेकर ईपीसी (EPC) और ओ एंड एम (O&M) सेवाएं शामिल हैं। कंपनी अब सौरव गांगुली के साथ मिलकर तकनीक और लोगों पर निवेश बढ़ा रही है, ताकि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।