चैत्र नवरात्रि 2026: पालकी पर सवार होकर आएंगी जगत जननी, जानें 19 मार्च को घटस्थापना का सबसे सटीक मुहूर्त

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आगरा: भक्ति, शक्ति और उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी उल्लासपूर्ण शुभारंभ होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार नवरात्रि की शुरुआत कई विशेष संयोगों के साथ हो रही है। माँ दुर्गा इस बार ‘पालकी’ (डोली) पर सवार होकर पधार रही हैं, जिसे शास्त्रों में भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना गया है।

घटस्थापना के लिए मिलेंगे 3 श्रेष्ठ मुहूर्त

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 19 मार्च को प्रातः 06:52 बजे तक अमावस्या रहेगी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि का उदय होगा।

श्रद्धालुओं के लिए कलश स्थापना के तीन प्रमुख समय उपलब्ध रहेंगे:

प्रथम मुहूर्त (प्रातः काल): सुबह 06:53 बजे से 08:17 बजे तक।

​द्वितीय मुहूर्त (अभिजीत काल): दोपहर 12:02 बजे से 12:52 बजे तक (यह सबसे श्रेष्ठ माना जाता है)।

तृतीय मुहूर्त (लाभ-अमृत बेला): दोपहर 12:26 बजे से अपराह्न 03:28 बजे तक।

पालकी पर आगमन: क्या कहता है शास्त्र?

​देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के प्रारंभ होने वाले दिन के आधार पर माता की सवारी निश्चित होती है। इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माँ का आगमन ‘दोला’ (पालकी) पर हो रहा है।

शास्त्रोक्त प्रमाण:

“शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता।।”

ज्योतिषीय विश्लेषण: पालकी पर देवी का आगमन

ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत शुभकारी नहीं माना जाता। पं. बृज मोहन दीक्षित के अनुसार, यह सवारी महामारी, रोग-दोष के प्रसार और राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता का संकेत देती है। व्यापारिक क्षेत्र में उतार-चढ़ाव और जनमानस में मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है।

​9 दिनों तक चलेगा शक्ति का अनुष्ठान

​19 मार्च से शुरू होकर यह महापर्व 27 मार्च तक चलेगा। इन नौ दिनों में भक्त माँ शैलपुत्री से लेकर माँ सिद्धिदात्री तक, नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। मान्यता है कि भले ही सवारी के संकेत चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई साधना सभी अरिष्टों (कष्टों) का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।