अखिलेश यादव का बड़ा आरोप: महिला आरक्षण बिल भाजपा की गुप्त योजना, दलित-पिछड़ी महिलाओं को कमज़ोर करने का चक्रव्यूह

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​नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के आगाज़ के साथ ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर देश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महिला आरक्षण को पूर्णतः लागू करने के लिए लाए जा रहे तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस बिल को पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं के खिलाफ एक गहरा ‘चक्रव्यूह’ करार दिया है।

​”भाजपा की साज़िश का काला दस्तावेज़”: अखिलेश

​गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “महिला आरक्षण बिल भाजपा और उनके संगी-साथियों के नये धोखे का एक ऐसा ‘काला दस्तावेज़’ है, जो दरअसल ‘ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना’ है।”

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए पिछड़े-दलित समाज की महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें हमेशा के लिए कमज़ोर करने की साज़िश रची जा रही है। उन्होंने इसे नारी के प्रति भाजपा की शोषणकारी और सामंती सोच का परिणाम बताया और कहा कि यह बिल महज एक ‘जनविरोधी जुमला’ है।

​सत्ता में बने रहने की ‘कुटिल राजनीति’

​अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एकजुटता का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा अपनी लगातार घटती लोकप्रियता और ‘एक्सपायरी डेट’ के करीब होने के कारण ऐसे हथकंडे अपना रही है। उनका दावा है कि इस बिल का असल मकसद सत्ता में बने रहना और पीडीए की एकता को तोड़ना है। उन्होंने महिलाओं को आगाह किया कि वे भाजपा के इस ‘छलावे’ में न आएं।

विशेष सत्र में पेश होंगे ये तीन अहम विधेयक

बता दें कि मोदी सरकार 2023 में पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अमली जामा पहनाने के लिए तीन नए विधेयक पेश करने जा रही है:

​केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026: इसके जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026: यह विधेयक नई जनसंख्या परिभाषा और संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा है।

​परिसीमन विधेयक 2026: इसके तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या का पुनर्गठन (Delimitation) किया जाना प्रस्तावित है।

विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया

​जहाँ एनडीए के सहयोगी दल इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, वहीं सपा सहित कई विपक्षी दल ‘कोटे के भीतर कोटा’ (OBC आरक्षण) की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। अखिलेश यादव के इस कड़े रुख के बाद सदन के भीतर तीखी नोकझोंक होने के आसार बढ़ गए हैं।