नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राजधानी दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस वर्ष मंत्रिपरिषद की यह पहली बैठक है, जो ऐसे समय में हो रही है जब राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें जोरों पर हैं।
प्रमुख एजेंडा: कामकाज और नीतिगत समीक्षा
शाम 5 बजे शुरू हुई इस बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए। सरकार के भीतर चल रही गहन राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं के मद्देनजर सभी केंद्रीय मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन के प्रदर्शन और प्रमुख नीतिगत फैसलों के कार्यान्वयन की बारीकी से समीक्षा करना है। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, अब तक लिए गए निर्णयों और प्राप्त परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वैश्विक संकट और चुनावी पृष्ठभूमि
यह उच्च-स्तरीय बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वर्तमान में वैश्विक संकट के भारत पर पड़ रहे प्रभाव, विशेष रूप से तेल की कीमतों, ईंधन आपूर्ति और बढ़ती लागत से जुड़ी चिंताओं पर सरकार बारीक नजर रख रही है। साथ ही, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा के हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद यह बैठक सरकार की भावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पीएम की सफल कूटनीतिक यात्रा का प्रभाव
यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के पांच देशों के सफल कूटनीतिक दौरे से लौटने के तुरंत बाद हुई है। अपनी यात्रा के दौरान पीएम ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। 15 मई से 20 मई तक चली इस यात्रा का मुख्य ध्येय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, नई तकनीकी साझेदारी करना और यूरोप में भारतीय अर्थव्यवस्था की उपस्थिति को और अधिक विस्तार देना था। बैठक में इन यात्राओं के परिणामों और उनके रणनीतिक लाभों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।


