आगरा। ताजनगरी के जयपुर हाउस स्थित माधव भवन में रविवार को आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था संस्कार भारती (आगरा महानगर) द्वारा आयोजित संत रविदास के व्यक्तित्व और काव्य पर आधारित चित्रकला एवं कैलीग्राफी प्रदर्शनी का। संत रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोहों की श्रृंखला के तहत आयोजित इस प्रदर्शनी ने कला के माध्यम से समाज को ‘जाति-पाति’ से ऊपर उठकर एक होने का संदेश दिया।
कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक: श्याम किशोर गुप्त
प्रदर्शनी का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ब्रज प्रांत के कार्यकारिणी सदस्य श्याम किशोर गुप्त, पूर्व मंत्री डॉ. राम बाबू हरित, और अखिल भारतीय अधिकारी बांकेलाल गौड़ द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। मुख्य अतिथि श्याम किशोर गुप्त ने कहा कि संत रविदास ने छुआछूत और ऊंच-नीच जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जो संघर्ष किया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है।
भक्ति और तपस्या की शक्ति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री डॉ. राम बाबू हरित ने कहा कि संत रविदास की साधना इतनी प्रबल थी कि ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ जैसी कहावतें जन-जन की जुबान पर चढ़ गईं। वहीं, बांकेलाल गौड़ ने उनके प्रेम और सद्भावना के संदेश को वर्तमान समय की महती आवश्यकता बताया।
कैनवास पर उतरी ‘रविदास वाणी’
प्रदर्शनी में आगरा के प्रख्यात कलाकारों और गुरुओं की कृतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया पोर्ट्रेट पेंटिंग्स के जरिये प्रो. बिंदु अवस्थी, डॉ. आभा सिंह गुप्ता, कैप्टन प्रो. नीलम कांत, डॉ. एकता श्रीवास्तव और प्रो. मीना कुमारी सहित कई युवा कलाकारों ने संत रविदास के विभिन्न स्वरूपों को कैनवास पर जीवंत किया।
वही कैलीग्राफी कला के साथ डॉ. मनोज कुमार और डॉ. रुपाली खन्ना के निर्देशन में कलाकारों ने संत रविदास के दोहों और काव्य को अपनी सुंदर लिखावट के जरिए आध्यात्मिक रूप दिया।
कलाकारों का सम्मान और सहभागिता
मांडला चित्रकार प्रतिभा भदौरिया और प्रांतीय महामंत्री नंद नंदन गर्ग ने सभी प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. आभा सिंह गुप्ता और डॉ. एकता श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से आए प्रबुद्ध जन, कवि और कला प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संयोजन ओम स्वरूप गर्ग और ललित कला संस्थान के उपनिदेशक डॉ. मनोज कुमार ने किया।
प्रदर्शनी के अंत में कवयित्री रश्मि सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने सिद्ध किया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति और सामाजिक सुधार का सशक्त माध्यम है।

