आगरा। ताजनगरी के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण की शिकायतों पर शिक्षा विभाग ने अब अपना चाबुक चला दिया है। आगरा के तीन बड़े और पुराने शिक्षण संस्थानों सेंट पॉल (सेंट पॉल्स), सेंट विंसेंट और सेंट जोसेफ गर्ल्स कॉलेज पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अभिभावकों पर जबरन थोपने के गंभीर आरोप लगे हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) डॉ. मुकेश अग्रवाल ने इन शिकायतों का कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
शासनादेश की धज्जियां उड़ा रहे रसूखदार स्कूल
उत्तर प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल केवल एनसीईआरटी (NCERT) या निर्धारित मानक पाठ्यक्रम की पुस्तकें ही चलाएंगे और किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने का दबाव नहीं बनाएंगे। इसके बावजूद, इन तीनों स्कूलों पर आरोप है कि वे नए सत्र में निजी पब्लिशर्स की किताबें अत्यधिक ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच ‘कमीशन का खेल’ चल रहा है, जिसका सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
डीआईओएस (द्वितीय) वीपी सिंह को सौंपी गई कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईओएस (द्वितीय) वीपी सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों की बुक-लिस्ट, प्रकाशकों के नाम, कीमतों में अंतर और विक्रेताओं के साथ स्कूलों के कथित गठजोड़ की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि जांच में स्कूल दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ मान्यता रद्द करने या भारी आर्थिक दंड लगाने जैसी कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों में आक्रोश, विभाग की कार्रवाई से उम्मीद
नए सत्र की शुरुआत के साथ ही आगरा के अभिभावक यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर हो रही ‘लूट’ से त्रस्त थे। संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि “किसी भी स्थिति में अभिभावकों का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम सभी स्कूलों के लिए समान हैं और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
अब शहर की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि इन तीन रसूखदार स्कूलों पर गाज गिरती है, तो आगरा के अन्य निजी स्कूलों के लिए भी यह एक बड़ी चेतावनी होगी जो शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं।

