आगरा: कलेक्ट्रेट परिसर में आम जनता की जनसुनवाई का कार्य समाप्त होते ही जिलाधिकारी मनीष बंसल का अगला पड़ाव कोई प्रशासनिक कार्यालय नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जमीनी हकीकत टटोलने के लिए खंदौली ब्लॉक के उजरई स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बना।
बिना किसी पूर्व सूचना या तामझाम के अचानक औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने स्कूल की व्यवस्थाओं को महज कागजी फाइलों या अधिकारियों की रिपोर्ट के भरोसे परखने के बजाय, खुद छात्राओं के बीच पहुंचकर सीधे संवाद का रास्ता चुना। उन्होंने कक्षाओं में बैठकर छात्राओं से उनकी पढ़ाई-लिखाई, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा प्रबंधों, साफ-सफाई और दैनिक सुविधाओं के बारे में एक-एक करके विस्तार से सवाल किए।
अचानक जिला के मुखिया को अपने बीच पाकर पहले तो छात्राएं थोड़ी असहज हुईं, लेकिन डीएम के बेहद सरल और आत्मीय स्वभाव के चलते कुछ ही पलों में माहौल पूरी तरह सहज हो गया और बालिकाओं ने बिना किसी झिझक के खुलकर अपने जवाब दिए। डीएम ने अधिकारियों के दावों को दरकिनार करते हुए बच्चों से सीधे जमीनी स्थिति जानने को अपनी प्राथमिकता बताया।
‘खाने में आज क्या मिला?’ से शुरू हुई पड़ताल
निरीक्षण की इस अनूठी प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी ने सबसे पहले छात्राओं से यह जानकारी ली कि उन्हें आज भोजन में क्या परोसा गया है, खाने की गुणवत्ता कैसी है और क्या उन्हें समय पर भरपेट भोजन मिल रहा है या नहीं। इसके बाद उन्होंने बच्चों से यह भी पूछा कि सुबह स्नान करने के लिए पानी की क्या स्थिति है, गीजर काम कर रहे हैं या नहीं, उनके कपड़े कौन धोता है, उन्हें कुल कितनी सेट ड्रेस मिली हैं और समय पर पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं या नहीं। उन्होंने कक्षाओं में लगी स्मार्ट टीवी की कार्यप्रणाली की भी जांच की और अंग्रेजी व गणित के शिक्षकों द्वारा पढ़ाई जा रहे पाठ्यक्रम की जानकारी लेकर छात्राओं की शैक्षिक समझ का कड़ाई से परीक्षण किया।
डीएम ने खुद उठाई किताब, पढ़ाने लगे अंग्रेजी और विज्ञान
निरीक्षण के दौरान माहौल तब और दिलचस्प हो गया जब जिलाधिकारी ने खुद एक किताब अपने हाथ में ली और छात्राओं से पाठ्यक्रम से जुड़े तीखे सवाल-जवाब करने लगे। उन्होंने जीव विज्ञान के ‘कोशिका’ के बुनियादी ज्ञान से लेकर अंग्रेजी के कठिन शब्दों के अर्थ तक छात्राओं से पूछे और उन्हें खुद पढ़ाकर उनकी बौद्धिक क्षमता का परीक्षण किया।
बालिकाओं का शिक्षा स्तर उच्च और संतोषजनक मिलने पर उन्होंने न सिर्फ छात्राओं की पीठ थपथपाई, बल्कि शिक्षकों का भी उत्साहवर्धन किया। डीएम ने छात्राओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वे कभी भी अपने सपनों को छोटे लक्ष्यों तक सीमित न रखें, बल्कि हमेशा बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कठिन परिश्रम को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताते हुए बालिकाओं के भीतर अदम्य आत्मविश्वास जगाया।
लैब से लेकर हॉस्टल तक हर कोने का गहन निरीक्षण
इसके बाद जिलाधिकारी उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के परिसर में पहुंचे, जहां कक्षा 9 और 10 की छात्राएं आवासीय रूप से अध्ययन करती हैं। यहां उन्होंने केवल क्लासरूम का ही नहीं, बल्कि भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान की प्रयोगशालाओं (लैब), पुस्तकालय (लाइब्रेरी), रसोई घर, छात्रावास के कमरों, खेलकूद के उपकरणों, शौचालयों, पेयजल की व्यवस्थाओं और सुरक्षा के कड़े इंतजामों का बहुत बारीकी से निरीक्षण किया।
उन्होंने पूरे विद्यालय परिसर में उच्च स्तर की साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने पर सबसे अधिक जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि छात्राओं को सिर्फता किताबी ज्ञान तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) ज्ञान और प्रतिदिन नियमित रूप से खेलकूद की गतिविधियों में भी शामिल किया जाए।
खुद खाना चखकर परखी गुणवत्ता, एचपीवी वैक्सीन पर की बात
विद्यालय की मेस में मिलने वाले भोजन की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी ने खुद अपने हाथों से खाना चखकर उसकी मौके पर ही जांच की। इससे उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि बच्चों के खानपान और पोषण के मामले में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्चीकृत विद्यालय की छात्राओं से संवाद करते हुए डीएम ने उन्हें गंभीर स्वास्थ्य संबंधी ‘एचपीवी वैक्सीन’ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने-अपने घरों और अभिभावकों को इसके लाभों के बारे में बताएं ताकि समाज में इस टीकाकरण को लेकर जागरूकता और अधिक बढ़ सके।
कंपोजिट स्कूल के बच्चों से भी लिया फीडबैक
इसके बाद जिलाधिकारी ने पास ही स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय उजरई (कंपोजिट) का भी औचक निरीक्षण किया। यहां उन्होंने अध्ययनरत छोटे-छोटे बच्चों से उनकी ड्रेस, जूते-मोजे और मुफ्त पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता के बारे में सीधे पूछताछ की। मिड-डे मील योजना के तहत मिलने वाले भोजन के संबंध में भी उन्होंने बच्चों से सीधा फीडबैक लिया। डीएम ने बच्चों को गणित के कुछ सवाल दिए और उन्हें अपने सामने ब्लैक बोर्ड पर हल करने को कहा, जिससे उनकी प्राथमिक शैक्षिक क्षमता और विषयों की मूल समझ को परखा जा सके।
13 कस्तूरबा विद्यालयों में सीएसआर फंड से बदलेगा कायाकल्प
निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिलाधिकारी ने जनपद के सभी 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी ‘सीएसआर फंड’ (CSR Fund) का उपयोग करके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह मजबूत करने का एक बड़ा और दूरदर्शी निर्णय लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) और सटीक एस्टीमेट तत्काल तैयार किया जाए।
इस वृहद कार्ययोजना में विद्यालय भवनों की टूट-फूट की मरम्मत और आकर्षक रंगाई-पुताई, आधुनिक शौचालय एवं वॉशरूम का निर्माण व सुधार, स्कूल की चारदीवारी (बाउंड्रीवॉल) को पूरी तरह दुरुस्त करना, पेयजल की उन्नत व्यवस्था करना, आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम विकसित करना, उच्चीकृत कंप्यूटर लैब की स्थापना, खिड़कियों और सुरक्षा जालियों की सुदृढ़ मरम्मत, हाथ धोने के लिए आधुनिक वाश बेसिन की व्यवस्था, छात्राओं के लिए आरामदायक कुर्सी-मेज की उपलब्धता, खेलकूद की आधुनिक सामग्री की खरीद, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और पोषण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाना जैसे तमाम महत्वपूर्ण कार्य शामिल होंगे। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीएसआर फंड के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता और उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक जिम्मेदार नोडल अधिकारी नामित किया जाए, और स्वीकृत किए गए सभी कार्य केवल कागजों पर सिमटे न रहकर जमीन पर पूरी गुणवत्ता के साथ दिखने चाहिए।
डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी
जिलाधिकारी ने जोर देते हुए कहा कि आज का दौर पूरी तरह तकनीकी और आधुनिक शिक्षा का दौर है, इसलिए हमारी बालिकाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और उन्हें एक उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आवासीय विद्यालयों में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था, उच्च कोटि की स्वच्छता, बेहतर पठन-पाठन का माहौल और सभी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय में वर्तमान में चल रहे बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य की गुणवत्ता को भी परखा। इस पूरे औचक निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार, डीसी बालिका कुलदीप तिवारी सहित संबंधित विभागों के तमाम प्रमुख अधिकारी उनके साथ मौजूद रहे।

