लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चर्चित और हाई-प्रोफाइल आजम खान मामले को लेकर प्रदेश का राजनीतिक तापमान एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस प्रकरण पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया है। डिप्टी सीएम ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब आजम खान सपा सरकार के शासनकाल में कैबिनेट मंत्री के पद पर आसीन थे, उस समय सरकार की कमान बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों में थी। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के दायरे में अखिलेश यादव को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
केशव प्रसाद मौर्य के इस आक्रामक रुख के सामने आने के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेता ने तर्क दिया कि तत्कालीन सरकार में एक शक्तिशाली मंत्री के रूप में आजम खान द्वारा किए गए निर्णयों और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री की भूमिका को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष न्याय का तकाजा यही है कि मामले की हर पहलू से गहन जांच हो और जिन-जिन जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उन सभी से निष्पक्ष पूछताछ की जानी चाहिए।
’अकेले नहीं थे आजम, सरकार के मुखिया अखिलेश थे’
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में स्पष्ट तौर पर कहा कि आजम खान कोई व्यक्तिगत स्तर पर सरकार नहीं चला रहे थे, बल्कि उस दौरान बाकायदा समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार काम कर रही थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक दायित्व संभाल रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे में किसी भी जांच का दायरा केवल एक ही व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तत्कालीन सरकार में शीर्ष जिम्मेदार पदों पर बैठे सभी लोगों की प्रशासनिक व नैतिक भूमिका की भी सूक्ष्म पड़ताल होनी चाहिए।
यूपी की सियासत में और तेज होगी आरोप-प्रत्यारोप की जंग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य के इस कड़े बयान को भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच लंबे समय से जारी तीखे राजनीतिक टकराव के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। आजम खान हमेशा से ही समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों और कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव के कार्यकाल में उनके पास नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। ऐसे में भाजपा की ओर से सीधे अखिलेश यादव का नाम घसीटे जाने से आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच वाकयुद्ध और ज्यादा आक्रामक होने के पूरे आसार हैं।
फिलहाल, इस तीखे राजनीतिक हमले के बाद अब समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रवक्ताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर और तीखे हो सकते हैं। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया की दिशा में जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्य ही अंतिम आधार बनेंगे, लेकिन केशव प्रसाद मौर्य के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए सियासी घमासान की नीव जरूर रख दी है।

