नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर तीखा विरोध जताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी हिरासत और पुलिस बल प्रयोग की तस्वीरें साझा करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि वे कोई गुंडे, माफिया या आतंकवादी नहीं, बल्कि देश की संसद के निर्वाचित सदस्य हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ बेहद बर्बरतापूर्ण और अलोकतांत्रिक व्यवहार किया है। इस मामले को लेकर उन्होंने संसद की विशेषाधिकार समिति का दरवाजा खटखटाया है।
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सभापति को लिखा पत्र, विशेषाधिकार हनन और अवमानना का नोटिस
राज्यसभा के सभापति एवं विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष हरिवंश को भेजे गए आधिकारिक पत्र में संजय सिंह ने गत 2 अक्टूबर और 10 अक्टूबर 2026 को हुई घटनाओं का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने उनके साथ लगातार शारीरिक बल का प्रयोग किया, अभद्रता की और बलपूर्वक हिरासत में लिया।
पत्र में उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर, जाफरपुर एसएचओ और अन्य दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ संसदीय विशेषाधिकार के हनन और सदन की अवमानना के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि वे इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत में भी एफआईआर दर्ज कराएंगे।
2 अक्टूबर की घटना का किया विशेष जिक्र
संजय सिंह ने पत्र और बयानों में विस्तार से बताया कि 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर वे चुनावी अनियमितताओं, मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर सूची से हटाए जाने और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के विरोध में जंतर-मंतर की ओर निकाले गए एक शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हुए थे।
मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन पर शारीरिक बल प्रयोग किया, उन्हें सड़क पर धक्का दिया, घसीटा और अपमानजनक व्यवहार करते हुए जबरन पुलिस बस में ठूंसकर हिरासत में ले लिया।
सांसद ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं दिल्ली पुलिस के आचरण, उसके अधिकारियों को दिए गए निर्देशों और बल का नेतृत्व करने वाले कमिश्नर की जवाबदेही पर बहुत गंभीर और बड़े प्रश्न खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि वे इस पूरी घटना से जुड़े सभी साक्ष्य विशेषाधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
