आगरा: दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), शास्त्रीपुरम में 10वीं के दो छात्रों के बीच हुए हिंसक विवाद ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। मारपीट में छात्र के दांत टूटने और जबड़ा फ्रैक्चर होने की घटना के बाद, दोनों नाबालिग छात्रों की पहचान सार्वजनिक किए जाने का मामला राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) तक पहुँच गया है। विख्यात चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस ने इस संबंध में आयोग को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कानून का उल्लंघन और वायरल वीडियो पर आपत्ति
नरेश पारस ने अपनी शिकायत में कहा है कि पीड़ित छात्र के पिता, जो स्वयं एक यूट्यूबर हैं, ने घायल पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया। यह किशोर न्याय (JJ Act 2015) के सिद्धांतों के विरुद्ध है। किसी भी स्थिति में नाबालिग पीड़ित या आरोपी की पहचान, फोटो या वीडियो सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है, क्योंकि इससे बच्चे की निजता और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
पुलिस और सोशल मीडिया की लापरवाही
मामले में थाना सिकंदरा पुलिस ने आरोपी छात्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। आरोप है कि पुलिस रिकॉर्ड से एफआईआर की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे आरोपी छात्र का नाम भी सार्वजनिक हो गया। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आगरा पुलिस के उच्चाधिकारियों ने सिकंदरा थाने के तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
एक्टिविस्ट की प्रमुख मांगें:
उच्चस्तरीय जांच: प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाए कि पहचान उजागर करने के लिए कौन जिम्मेदार है।
कंटेंट हटाना: सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वायरल वीडियो, फोटो और एफआईआर की प्रतिलिपि तत्काल हटवाई जाए।
स्कूल की भूमिका: स्कूल परिसर में सुरक्षा और प्रोटोकॉल की संभावित लापरवाही की भी जांच हो।
दोषियों पर एक्शन: जिन लोगों ने जानबूझकर या लापरवाही से बच्चों की पहचान उजागर की, उन पर कानूनी कार्रवाई हो।
नरेश पारस का तर्क है कि जहां छात्रों के बीच हुई हिंसा चिंताजनक है, वहीं व्यवस्था द्वारा नाबालिगों के अधिकारों की अनदेखी करना उससे भी बड़ा कानूनी अपराध है। फिलहाल, आयोग इस मामले में संज्ञान लेकर संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब कर सकता है।

