महामना मालवीय मिशन का 48वां स्थापना दिवस: आगरा में जुटे दिग्गज, शिक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का गूंजा शंखनाद

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​आगरा: भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय के आदर्शों को समर्पित ‘महामना मालवीय मिशन’ का 48वां स्थापना दिवस ताजनगरी में अत्यंत गरिमामयी ढंग से मनाया गया। न्यू आगरा स्थित समृद्ध सागर अपार्टमेंट में आयोजित इस समारोह में शिक्षाविदों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना के प्रसार का संकल्प लिया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 50 विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने महामना के विजन पर मंथन किया।

मालवीय जी के विचार: एक वैचारिक क्रांति

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशिका प्रो॰ बीना शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मालवीय जी का जीवन और उनके मूल्य आज के डिजिटल युग में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो-वाईस चांसलर प्रो॰ वेद प्रकाश त्रिपाठी ने जोर देकर कहा कि मालवीय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। उन्होंने मिशन की ‘वांग्मय परियोजना’ की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण के लिए एक सशक्त आधार बताया।

​शिक्षा और राष्ट्रवाद का संगम

​वक्ताओं ने पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित शिक्षा, राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता के स्तंभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आह्वान किया कि इन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना ही महामना को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह साझा किया गया कि संगठन आने वाली पीढ़ियों के चरित्र निर्माण और उन्हें सही दिशा देने के लिए एक सक्रिय मंच के रूप में कार्य कर रहा है।

भविष्य की भव्य योजनाएं

​आगरा संभाग के महासचिव राकेश चंद्र शुक्ला, जिन्होंने कार्यक्रम का कुशल संचालन भी किया, ने मिशन की भविष्य की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि आगामी समय में मिशन और अधिक व्यापक, प्रभावशाली और भव्य कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने का प्रयास करेगा। कार्यक्रम के अंत में कोषाध्यक्ष प्रो॰ वी.के. सिंह ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

​गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति

समारोह में उपाध्यक्ष प्रभाकर शर्मा (आईआरएस), प्रो॰ नीलम यादव, कविवर राजेंद्र मिलन, प्रो॰ पूर्णिमा जैन, एडवोकेट संजय कुमार, प्रो॰ पी.एन. अस्थाना और श्रीमती आरती शर्मा सहित भारी संख्या में विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कवियों और लेखकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में बौद्धिक विमर्श के साथ-साथ सांस्कृतिक रस भी घोल दिया।