आगरा के 18 नामचीन स्कूलों पर गिरेगी गाज! RTE दाखिलों में मनमानी पर मान्यता रद्द करने की तैयारी

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आगरा, 21 अप्रैल: ताजनगरी के शिक्षा जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने शहर के 18 प्रतिष्ठित स्कूलों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया। ये स्कूल ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) अधिनियम के तहत चयनित गरीब बच्चों को प्रवेश देने में लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले इन संस्थानों को न केवल बंद किया जा सकता है, बल्कि इन्हें यू-डायस (U-DISE) पोर्टल से भी स्थायी रूप से हटाने की तैयारी है।

​अभिभावकों का उत्पीड़न और वेरिफिकेशन का बहाना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) जितेंद्र कुमार गौड़ के पास लगातार शिकायतें पहुँच रही थीं कि स्कूल प्रबंधक आरटीई के तहत चयनित बच्चों के अभिभावकों को अनावश्यक दस्तावेजों के लिए चक्कर लगवा रहे हैं। वेरिफिकेशन और सत्यापन के नाम पर गरीब परिवारों को परेशान किया जा रहा है और दाखिले की प्रक्रिया को जानबूझकर टाला जा रहा है।

​इन प्रमुख स्कूलों पर लटकी तलवार

शिक्षा विभाग ने जिन 18 स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी किया है, उनमें शहर के कई रसूखदार नाम शामिल हैं। सूची में होली पब्लिक ग्रुप के विभिन्न स्कूल (लोहामंडी, दिल्ली गेट, शाहगंज, शास्त्रीपुरम, आवास विकास, सिकंदरा), दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की शास्त्रीपुरम व पोइया घाट शाखाएं, और गायत्री पब्लिक स्कूल (शास्त्रीपुरम व मंडी सईद खां) प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा सेंट विल्स, श्रीराम सेंटेनियल, सेंट जॉर्जेज यूनिट-2 और रागेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों को भी कड़ी चेतावनी दी गई है।

प्रशासन की दोटूक: “दाखिला नहीं तो स्कूल नहीं”

बीएसए जितेंद्र कुमार गौड़ ने कड़े लहजे में कहा कि आरटीई में चयनित विद्यार्थियों का प्रवेश हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने बताया कि कई विद्यालय जानबूझकर प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं। यदि इन स्कूलों ने तत्काल प्रभाव से बच्चों का नामांकन नहीं किया, तो विभाग उनकी मान्यता रद्द करने की अंतिम रिपोर्ट शासन को भेज देगा।

​यह कार्रवाई उन निजी स्कूलों के लिए एक बड़ा सबक है जो कानूनन अनिवार्य होने के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के मुख्य अधिकार से वंचित रखने की कोशिश कर रहे हैं। अब शहर की निगाहें इन स्कूलों के अगले कदम पर टिकी हैं।