लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़, गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टो के जरिए अमेरिकी नागरिकों को बनाते थे निशाना, 119 गिरफ्तार

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लखनऊ: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराध के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग के 11वें फ्लोर पर संचालित एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस सुनियोजित ऑपरेशन में पुलिस ने मौके से 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने घटनास्थल से साइबर अपराध में प्रयुक्त 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, अन्य डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं।

अमेरिका को निशाना बनाने वाला हाई-टेक नेटवर्क

पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। इसका पर्यवेक्षण संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार और मार्गदर्शन पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव द्वारा किया गया। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव (IPS) के नेतृत्व में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर एवं प्रभारी साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने 1 जुलाई को इस गिरोह को पकड़ा। यह गिरोह ‘सोलारिस साल्यूशन’ (Solaris Solutions) नामक कंपनी के बैनर तले जनवरी 2025 से बिना किसी साइनबोर्ड के अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।

​भय और झांसे का खेल: 250 करोड़ से अधिक की ठगी

जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग विदेशी नागरिकों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के लोगों को भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों एवं सरकारी एजेंसियों के नाम पर ठगता था। गिरोह के कर्मचारी विदेशी नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को फोन करते थे। उन्हें बैंक खाते से पैसे डेबिट होने, तकनीकी समस्या, पार्नोग्राफी या अन्य वित्तीय जोखिम का झांसा देकर ‘मदद’ के नाम पर जाल में फंसाया जाता था। बदनामी का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड, डिजिटल कूपन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम ऐंठी जाती थी, ताकि लेन-देन सरकारी निगरानी से बच सके। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह अब तक 250 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर चुका है।

अहमदाबाद से कनेक्शन और हवाला का जाल

कॉल सेंटर का मालिक विनीत शर्मा बताया जा रहा है। जांच में सामने आया कि विनीत शर्मा ठगी की रकम तीन देशों से होते हुए हवाला के जरिए भारत मंगाता था। इस गिरोह का नेटवर्क लखनऊ के अलावा पांच से अधिक राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस ने अहमदाबाद निवासी ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को हिरासत में लिया है।

​विशेष प्रशिक्षण और मोटी कमाई का लालच

पुलिस पूछताछ में पता चला कि काल सेंटर में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी पूर्वोत्तर राज्यों के हैं। उन्हें अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करने के लिए करीब ढाई माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। कर्मचारियों को 30 से 40 हजार रुपये मासिक वेतन के साथ ठगी की रकम पर लगभग दस प्रतिशत तक कमिशन दिया जाता था। इसी प्रलोभन के चलते कई कर्मचारी हर माह डेढ़ से दो लाख रुपये तक कमा रहे थे।

​फिलहाल, कमिश्नरेट लखनऊ की साइबर सेल एवं साइबर थाना की संयुक्त टीम इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस अब कंपनी के अन्य साझेदारों, संचालकों और इस पूरे अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।