आगरा: विश्व जल दिवस के अवसर पर ताजनगरी में ‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ द्वारा आयोजित एक विशेष संगोष्ठी में जल संकट के गहराते बादलों पर तीखा मंथन हुआ। ताज नगरी फेस-2 स्थित नृत्य ज्योति कथक केंद्र में जुटे पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पानी अब भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि वर्तमान की ‘इमरजेंसी’ है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल प्रबंधन को अधिकार आधारित नहीं बनाया गया, तो आने वाली नस्लें प्यासी रह जाएंगी।
”अमीर खरीदे बोतल, गरीब पिए जहर”: बाजारीकरण पर प्रहार
कार्यक्रम के संयोजक बृज खंडेलवाल ने उद्घाटन भाषण में विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “कैसा विकास, जहाँ आम आदमी को शुद्ध पानी तक नसीब नहीं? सुरक्षित पेयजल को कानूनी तौर पर मौलिक अधिकार घोषित किया जाना चाहिए।” उन्होंने पानी के बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सामाजिक खाई को बढ़ा रहा है, जहाँ संपन्न वर्ग बोतलबंद पानी खरीद रहा है और निर्धन वर्ग दूषित जल पीने को मजबूर है।
कुप्रबंधन और गिरता भूजल: विशेषज्ञों की राय
पर्यावरणविद् डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने आंकड़ों के जरिए संकट की भयावहता रखी। उन्होंने बताया कि भारत के पास दुनिया की 18% आबादी है, लेकिन मीठा जल मात्र 4%। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संसाधनों की कमी से ज्यादा कुप्रबंधन (Mismanagement) का परिणाम है। संगोष्ठी में शहरी जल प्रबंधन की पोल खोलते हुए बताया गया कि पाइपलाइन लीकेज के कारण करीब 40% पानी बर्बाद हो जाता है, जिसका फायदा टैंकर माफिया उठा रहे हैं।
बच्चों ने चित्रकला से दिया संरक्षण का संदेश
संगोष्ठी के साथ-साथ बच्चों के लिए जल संरक्षण विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता और प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। नन्हे कलाकारों ने अपनी कूचियों से गिरते जलस्तर और सूखती नदियों का दर्द उकेरा। विशाल झा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि निर्णायक की भूमिका बृज खंडेलवाल और डॉ. भट्टाचार्य ने निभाई।
प्रमुख वक्ता और माँगें:
संगोष्ठी में चतुर्भुज तिवारी, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, राहुल नंदवंशी, दीपक राजपूत, पंडित जुगल किशोर और पद्मिनी अय्यर सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे। उनकी प्रमुख माँगें व सुझाव निम्नलिखित रहे:
स्मार्ट मीटरिंग: पानी की बर्बादी रोकने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और स्मार्ट मीटरिंग अपनाई जाए।
अवैध बोरवेल पर रोक: गिरते भूजल को बचाने के लिए अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण हो।
अधिकार आधारित दृष्टिकोण: जल जीवन मिशन के तहत केवल ‘नल’ नहीं, बल्कि ‘नियमित स्वच्छ जल’ सुनिश्चित हो।

