नई दिल्ली। इस बार आपके संडे (रविवार) के वीकेंड का मजा किरकिरा हो सकता है और ऑनलाइन सुविधाओं का स्वाद पूरी तरह फीका पड़ सकता है। यदि आप 17 मई को ओला-उबर (Ola-Uber) से कहीं बाहर जाने की योजना बना रहे हैं, स्विगी-जोमैटो (Swiggy-Zomato) से पसंदीदा खाना मंगवाना चाहते हैं, या फिर जेप्टो-ब्लिंकिट (Zepto-Blinkit) से 10 मिनट में राशन डिलीवर कराने की सोच रहे हैं, तो आपको तगड़ा झटका लगने वाला है। इतना ही नहीं, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और मिंत्रा जैसी ई-कॉमर्स साइट्स से आने वाले आपके पार्सल का इंतजार भी बढ़ सकता है। दरअसल, अपनी विभिन्न जायज मांगों को लेकर देश के लाखों गिग वर्कर्स (Gig Workers) रविवार को एक बड़ी देशव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं।
हड़ताल की टाइमिंग नोट कर लें (कब से कब तक प्रभावित रहेगी सर्विस?)
’गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ (GIPSWU) के आधिकारिक ऐलान के मुताबिक, यह हड़ताल रविवार, 17 मई 2026 को दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (पूरे 5 घंटे) चलेगी। इस दौरान ऐप आधारित सभी प्रमुख सेवाएं (Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato, Zepto, Blinkit) पूरी तरह से ठप और बंद रहेंगी। आम जनता को परेशानी से बचने के लिए इस समयावधि से पहले या बाद में ही अपनी जरूरी बुकिंग्स और ऑर्डर्स निपटाने की सलाह दी गई है।
आखिर क्यों हड़ताल करने पर मजबूर हुए गिग वर्कर्स?
इस अचानक बुलाई गई हड़ताल की मुख्य वजह देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई करीब ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी है। लगभग 4 साल के लंबे अंतराल के बाद ईंधन की दरों में यह अब तक का सबसे बड़ा उछाल है, जिसने सीधे तौर पर डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवरों की जेब पर डाका डाला है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। घरेलू तेल कंपनियों ने घाटे से उबरने के लिए जैसे ही दाम बढ़ाए, इसका सीधा असर इन वर्कर्स पर पड़ा। इसके अलावा, एलपीजी (LPG) संकट के चलते कई क्लाउड किचन और रेस्तरां या तो बंद हो गए हैं या उन्होंने अपने मेन्यू सीमित कर दिए हैं, जिससे फूड डिलीवरी ऐप्स के ऑर्डर वॉल्यूम में 50 से 70 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में उन डिलीवरी पार्टनर्स की कमर पूरी तरह टूट गई है, जिनकी दैनिक आजीविका ऑर्डर्स की संख्या पर मिलने वाले इंसेंटिव पर टिकी होती है।
प्रमुख मांग: “₹20 प्रति किलोमीटर का मिले न्यूनतम रेट”
यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस मूल्य वृद्धि को गिग वर्कर्स पर एक सीधा और क्रूर प्रहार बताया है। उन्होंने कहा “देश के डिलीवरी और कैब पार्टनर्स पहले ही भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और चौतरफा महंगाई की मार झेल रहे हैं। अमेज़न, स्विगी, जोमैटो और जेप्टो जैसी दिग्गज कंपनियों के वर्कर्स अब ईंधन और वाहनों के रख-रखाव के इस बढ़े हुए भारी खर्च का बोझ उठाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं। हम सरकार और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से पुरजोर मांग करते हैं कि हमारे वर्कर्स के लिए कम से कम ₹20 प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तुरंत तय किया जाए।”
गिग इकोनॉमी के भविष्य पर मंडराया संकट
यूनियन ने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों के अनुपात में वर्कर्स की प्रति किलोमीटर कमाई नहीं बढ़ाई गई, तो देश के लाखों युवा इस सेक्टर को हमेशा के लिए छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे। इसका सीधा और घातक असर देश की तेजी से उभरती ‘गिग इकोनॉमी’ पर पड़ेगा।
नीति आयोग के एक हालिया अनुमान के अनुसार, इस सेक्टर में चुनौतियां भले ही ज्यादा हैं, लेकिन इसमें विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। देश में गिग वर्कर्स की संख्या जो साल 2020-21 में महज 77 लाख थी, उसके साल 2029-30 तक बढ़कर 2.3 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया है, जिसे बचाने के लिए कंपनियों को इन कामगारों के हितों की रक्षा करनी ही होगी।


