आगरा। भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ ‘भारतीय जीवन बीमा निगम’ (LIC) के अस्तित्व और उसकी स्वायत्तता को लेकर ताजनगरी में एक बड़ा वैचारिक मंथन शुरू हुआ है। कोठी मीना बाजार स्थित होटल कोटल ग्रांड मरक्युर में नेशनल फैडरेशन ऑफ इन्श्योरेन्स फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया (उत्तर-मध्य क्षेत्र) की दो दिवसीय क्षेत्रीय आम सभा का आगाज हुआ। इस महाधिवेशन में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 200 से अधिक शाखाओं के लगभग 700 प्रतिनिधि और अधिकारी अपनी एकजुटता दिखाने जुटे हैं।
सभा के दौरान राष्ट्रीय महासचिव विवेक सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि LIC को कमजोर करने का कोई भी प्रयास सीधे तौर पर देश की वित्तीय सेहत को बिगाड़ सकता है। उन्होंने IRDAI की मौजूदा नीतियों और ‘बीमा सुगम’ प्लेटफॉर्म पर चिंता जताते हुए कहा कि इनसे देश के 14 लाख एजेंटों की आजीविका संकट में है। विवेक सिंह ने तर्क दिया कि ग्राहकों को 2-3 प्रतिशत सस्ता बीमा देने के प्रलोभन में विशेषज्ञ सलाह की अनदेखी की जा रही है, जिससे भविष्य में ‘मिस-सेलिंग’ और दावों के निपटारे में बड़ी समस्याएं खड़ी होंगी।
अधिवेशन में इस बात पर जोर दिया गया कि 28 करोड़ पॉलिसीधारकों के भरोसे पर टिकी LIC हर राष्ट्रीय संकट में सरकार के साथ ढाल बनकर खड़ी रहती है। वक्ताओं ने कहा कि निजी कंपनियों की जवाबदेही उतनी सख्त नहीं है, जितनी LIC की है, इसलिए निगम के ढांचे से छेड़छाड़ करना राष्ट्रहित के विरुद्ध होगा। संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इन चिंताओं को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात करेगा।
कार्यक्रम के दौरान पी.एस. नेगी ने उत्तर-मध्य क्षेत्र की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि इस क्षेत्र ने देश भर में व्यावसायिक मानकों और उत्कृष्ट प्रदर्शन के मामले में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं, प्रेस वार्ता में पदाधिकारियों ने जीएसटी राहत के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति को बल मिला है।
आगरा डिवीजन के अध्यक्ष अनिल कुमार द्विवेदी और सचिव मुकुल उपमन्यु के कुशल संयोजन में आयोजित इस सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. विनय बाबू, मनीष रस्तोगी, संजय साही और रावील त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
संगठन का मानना है कि इस दो दिवसीय मंथन से निकलने वाले प्रस्ताव LIC को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और संगठन को और अधिक जुझारू बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।


