शास्त्र ही धर्म का संविधान हैं… आगरा के यमुना तट पर मनःकामेश्वर मठ की भागवत कथा में बोले महंत योगेश पुरी

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आगरा, 18 मई। ताजनगरी आगरा में यमुना किनारे स्थित ताज व्यू गार्डन फेस-1 पार्किंग क्षेत्र में भक्ति और अध्यात्म का एक अनूठा प्रवाह देखने को मिल रहा है। यहाँ श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का बेहद भव्य और अलौकिक आयोजन शुरू किया गया है।

इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए कथा मंडपम को विशेष और आकर्षक रूप से सजाया गया है। पंडाल में साक्षात श्रीनाथजी स्वरूप और द्वादश ज्योतिर्लिंग की भव्य झांकियां सजाई गई हैं, जो यहाँ आने वाले भक्तों को आगरा में ही साक्षात अलौकिक ब्रजधाम की दिव्य अनुभूति करा रही हैं।

इस पावन कथा का विधिवत शुभारम्भ पूरी धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री गणेश के पूजन-अर्चन और 11 प्रकांड विद्वान ब्राह्मणों द्वारा किए गए गगनभेदी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन मुख्य कथा व्यास श्री महंत योगेश पुरी ने व्यासपीठ से अमृत वर्षा करते हुए पुरुषोत्तम मास (मलमास) की महिमा, दान की शक्ति, सच्ची भक्ति और आत्मज्ञान के गूढ़ महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

श्रद्धालुओं को ज्ञान मार्ग की ओर प्रेरित करते हुए कथा व्यास महंत योगेश पुरी ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने अपने प्रवचन में जोर देते हुए कहा कि “शास्त्र ही वास्तव में हमारे धर्म का सच्चा संविधान हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भागवत जैसी दिव्य कथा का पूर्ण फल प्राप्त करने और इसे अपने भीतर आत्मसात करने के लिए मन और शरीर दोनों की शुद्धता तथा एकाग्रता होना अत्यंत आवश्यक है।

​इस भव्य धार्मिक उत्सव में भक्ति के रंग को और गहरा करने के लिए कथा के साथ-साथ कार्यक्रम स्थल पर प्रतिदिन सांध्य बेला में भव्य यमुना आरती का भी विशेष आयोजन किया जा रहा है। मां यमुना की इस पावन महाआरती और भागवत कथा के रसपान के लिए आगरा और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु रोज मंडपम में पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और जयकारों से गुंजायमान हो उठा है।