लखनऊ: राम मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्रस्ट द्वारा जारी स्पष्टीकरण पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ट्रस्ट की सफाई को अपर्याप्त और संदिग्ध करार देते हुए कहा कि यह केवल एक शाब्दिक औपचारिकता मात्र है।
”स्पष्टीकरण ही स्पष्ट नहीं है”
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रस्ट का स्पष्टीकरण पूरी तरह से अस्पष्ट है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि ये इनके लिए हर हफ्ते की साधारण बात हो गई है, जिसे ये अब उल्लेखनीय भी नहीं मानते।” सपा प्रमुख ने ट्रस्ट के सदस्यों के हाव-भाव और देह की भाषा (Body Language) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे हताशा और निराशा से भरे हुए नजर आ रहे हैं।
ट्रस्टियों से की ‘संयुक्त स्पष्टीकरण’ की मांग
अखिलेश ने मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर प्रेस वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हेराफेरी की शंका के केंद्र में कोई एक व्यक्ति विशेष नहीं है, इसलिए किसी एक सदस्य द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण मायने नहीं रखता।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी ट्रस्टी एक साथ बैठेंगे, तो सच तत्काल सामने आ जाएगा क्योंकि उनमें से हर कोई एक जैसा नहीं है। साथ ही, उन्होंने सीसीटीवी कैमरों के साक्ष्यों का मिलान करने की भी मांग की।
सफाई में देरी पर उठाए सवाल
सपा मुखिया ने स्पष्टीकरण आने में लगे समय पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट किया जाए कि मात्र 40 सेकंड की बात कहने में इतने घंटे क्यों लग गए? और स्पष्टीकरण के नाम पर एक मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है?” उन्होंने राज्य सरकार की चुप्पी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जैसे सरकार शांत है, वैसे ही यह सफाई भी संदिग्ध है।
अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि इस कमजोर स्पष्टीकरण ने न केवल देश की जनता, बल्कि संपूर्ण विश्व के सनातन समाज को और अधिक शंकित और आहत किया है।


