आगरा। इन दिनों शहरभर में गणेश उत्सव की धूम पूरी परवान पर है, और इसी बीच आगरावासियों के लिए महाराष्ट्र के पारंपरिक और लाजवाब जायकों का एक बेहतरीन तोहफा आ गया है। संजय प्लेस स्थित कॉसमॉस मॉल के प्रतिष्ठित होटल ‘फेयरफील्ड बाय मैरियट’ में पहली बार एक भव्य ‘मराठी फूड फेस्टिवल’ का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 25 सितंबर तक चलने वाले इस फूड फेस्टिवल के दौरान शहरवासियों को हर रात के डिनर में एक से बढ़कर एक 20 से अधिक ऑथेंटिक महाराष्ट्रीयन व्यंजनों का स्वाद चखने का सुनहरा मौका मिलेगा।
मेन्यू में शामिल हैं एक से बढ़कर एक लजीज पकवान
फ्यूजन और परंपरा के इस अनूठे मेल वाले मेन्यू में स्ट्रीट फूड से लेकर शाही व्यंजनों तक की भरमार है। खाने के शौकीनों के लिए यहां वड़ा पाव, मिसल पाव, कोथिंबीर वड़ी, साबूदाना वड़ा, कांदा भजी, बटाटा वड़ा और उसल जैसे लोकप्रिय स्नैक्स उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, मुख्य भोजन में पुरणपोली, भरली वांगी, थालीपीठ, पिठला-भाकरी, मसाला भात, आमटी, वरण-भात, ज्वार भाकरी के साथ-साथ मांसाहारी प्रेमियों के लिए खास तौर पर कोल्हापुरी मटन करी और चिकन कोल्हापुरी भी परोसी जा रही है। विशेष तौर पर चल रहे गणेशोत्सव के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक चावल के मोदक इस फूड फेस्टिवल का सबसे बड़ा और खास आकर्षण बने हुए हैं।
शेफ अश्वनी निगम और कोल्हापुर के विशेषज्ञों की जोड़ी का कमाल
होटल के हेड शेफ अश्वनी निगम ने जानकारी देते हुए बताया कि यह होटल के इतिहास में पहला मौका है जब इतने बड़े स्तर पर मराठी फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया है। इसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही प्रकार के व्यंजनों के साथ-साथ ताजे सलाद, आकर्षक मेन कोर्स और मुंह मीठा करने के लिए बेहतरीन डेजर्ट्स शामिल किए गए हैं।
इन पारंपरिक और खानदानी व्यंजनों में असली महाराष्ट्र की खुशबू और स्वाद लाने के लिए ‘शेफ किचन इंस्टीट्यूट ऑफ कलिनरी आर्ट एंड होटल मैनेजमेंट, कोल्हापुर’ के विशेष प्रशिक्षक शेफ रविंद्र और गंगाधर खुद अपनी देखरेख में सभी पकवान तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्रीयन खान-पान की असली पहचान वहां के अनोखे और पारंपरिक मसालों में छिपी होती है। यहां बनने वाले व्यंजनों में कांदा-लहसुन चटनी, खास काला मसाला, पत्थर पर हाथ से पिसे हुए मसाले, साथ ही मूंगफली और ताजे नारियल का इस्तेमाल स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। इस फेस्टिवल के जरिए मेहमानों को महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र कोकण से लेकर ऐतिहासिक कोल्हापुर और विदर्भ तक की भोजन परंपरा की सजीव झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिल रही है।
