बाबा साहब के नाम पर सत्ता की बिसात! 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में दिखेगा सभी पार्टियों का मेगा पावर शो

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 14 अप्रैल का दिन महज एक जयंती उत्सव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों का ‘लिटमस टेस्ट’ बनने जा रहा है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के बहाने सूबे के तमाम दिग्गज दल भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस दलित वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक, रैलियों और जन-जागरण अभियानों के जरिए सियासी दल अपनी ताकत का मुजाहिरा करेंगे।

वेस्ट यूपी में पीएम मोदी का ‘विकास कार्ड’ और दलित दांव

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार अपने सबसे बड़े चेहरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतारा है। वेस्ट यूपी के दलित बाहुल्य इलाके सहारनपुर में पीएम मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। पिछले दो महीनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह उनका तीसरा दौरा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक्सप्रेसवे तो एक जरिया है, असली मकसद आंबेडकर जयंती के मौके पर दलित मतदाताओं को भाजपा की विकास धारा से जोड़ना है।

सपा का ‘संविधान बचाओ’ अभियान और गांव-गांव दस्तक

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा के विकास कार्ड की काट ‘सामाजिक न्याय’ और ‘संविधान बचाओ’ अभियान से निकाली है। अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे गांव-गांव और सेक्टर स्तर तक जाकर आंबेडकर जयंती मनाएं। सपा का लक्ष्य दलितों के बीच यह संदेश देना है कि संविधान की रक्षा केवल समाजवादी विचारधारा ही कर सकती है।

​मायावती का लखनऊ में महाकुंभ, चंद्रशेखर भी तैयार

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लखनऊ में एक विशाल प्रदेश स्तरीय आयोजन करने जा रही है। मायावती ने सभी 18 मंडलों के कार्यकर्ताओं को राजधानी में जुटने का आह्वान किया है, ताकि वे अपनी कोर ताकत (दलित वोट) को एकजुट रख सकें। वहीं, चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी पूरे प्रदेश में रैलियां और गोष्ठियों के जरिए बहुजन समाज को लामबंद करने में जुटी है।

​कांग्रेस का जिलावार प्लान: हर घर पहुंचेगा संविधान का संदेश

लंबे समय से दलितों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही कांग्रेस ने सभी 75 जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी नेतृत्व ने जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे बाबा साहब के सिद्धांतों और संविधान के महत्व को आम जन तक पहुँचाएं।

कुल मिलाकर, 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की धरती एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील होने वाली है, जहाँ हर दल खुद को बाबा साहब की विचारधारा का असली वारिस साबित करने की होड़ में होगा।