महाराष्ट्र की सियासत में ‘इमोशनल कार्ड’: सुनेत्रा पवार ने चला शरद पवार जैसा दांव, क्या झुकेंगे उद्धव ठाकरे?

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार’ सरनेम हमेशा से अपनी अप्रत्याशित रणनीतियों के लिए जाना जाता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने बारामती उपचुनाव को लेकर एक ऐसा दांव चला है, जिसने महाविकास अघाड़ी (MVA) के खेमे में हलचल मचा दी है।

अपने दिवंगत पति अजित पवार की राजनीतिक विरासत को सहेजने के लिए उन्होंने सीधे शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे से संपर्क साधा है। इसे राज्य की राजनीति में एक ‘क्लासिक शरद पवार मूव’ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ भावनाओं और कूटनीति का सटीक मेल है।

उद्धव ठाकरे को फोन: रिश्तों की दुहाई और सियासी दबाव

28 जनवरी को एक दुखद विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई बारामती सीट पर 23 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए सुनेत्रा पवार ने उद्धव ठाकरे को फोन कर समर्थन मांगा है।

उन्होंने अपील की है कि परिवार के पुराने रिश्तों और अजित दादा के प्रति सम्मान दिखाते हुए शिवसेना अपना उम्मीदवार न उतारे, ताकि यह चुनाव निर्विरोध संपन्न हो सके। संजय राउत ने इस संवाद की पुष्टि करते हुए संकेत दिया है कि ठाकरे परिवार इस भावनात्मक अपील पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

विपक्ष में दरार: कांग्रेस को अकेले छोड़ने की रणनीति?

सुनेत्रा पवार की इस चाल ने विपक्षी गठबंधन (MVA) के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। जहाँ शरद पवार की एनसीपी ने पहले ही मैदान से हटने का संकेत दिया है, वहीं कांग्रेस अब भी इस सीट पर दावा ठोक रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल की दावेदारी के बीच सुनेत्रा ने उद्धव ठाकरे का साथ मांगकर कांग्रेस को रणनीतिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास किया है। अगर शिवसेना (UBT) समर्थन देती है, तो कांग्रेस के लिए अकेले चुनाव लड़ना और जीतना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

भावनात्मक लहर और राजनीतिक संस्कृति की दुहाई

एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विपक्षी दलों से ‘राजनीतिक संस्कृति’ का हवाला देते हुए सुनेत्रा पवार का समर्थन करने की अपील की है। तटकरे का कहना है कि बारामती की जनता अभी शोक में है और ऐसे समय में चुनाव के बजाय सहानुभूति और एकजुटता दिखाना ही सही श्रद्धांजलि होगी।

​सुनेत्रा पवार का राजनीतिक इम्तिहान

31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद और बाद में पार्टी अध्यक्ष की कमान संभालने वाली सुनेत्रा पवार के लिए 6 अप्रैल को होने वाला नामांकन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ है। अजित पवार ने यहाँ से 8 बार जीत दर्ज की थी और 2024 में अपने ही भतीजे को बड़े अंतर से हराया था। अब सुनेत्रा उसी साख को बचाने के लिए मैदान में हैं। यदि वे इस सीट को निर्विरोध जीतने में सफल रहती हैं, तो यह न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत होगी, बल्कि पवार परिवार की विरासत पर उनकी पकड़ को भी सर्वमान्य बना देगी।