आगरा ADA की बड़ी लापरवाही: अवैध निर्माण सील करने के चक्कर में अंदर ही कैद कर दिया मजदूर का परिवार

स्थानीय समाचार

आगरा: ​ताजनगरी में आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के प्रवर्तन दल का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने विभाग की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं। शाहगंज वार्ड के अर्जुन नगर इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची टीम ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए एक निर्माणाधीन बिल्डिंग को बाहर से सील कर दिया, जबकि उसके अंदर एक मजदूर का पूरा परिवार मौजूद था।

​4 घंटे तक कैद रही मासूमियत

यह घटना मंगलवार की है, जब एडीए के जूनियर इंजीनियर धीरेंद्र के नेतृत्व में टीम नवीन कुमार द्वारा बनवाए जा रहे अवैध निर्माण को सील करने पहुंची थी। आरोप है कि टीम ने यह सुनिश्चित करने की जहमत भी नहीं उठाई कि बिल्डिंग के भीतर कोई है या नहीं। आनन-फानन में सील लगाकर टीम रवाना हो गई, जिससे अंदर मौजूद चार महिलाएं और एक मासूम बच्चा ‘जिंदा बंधक’ बन गए। करीब चार घंटे तक यह परिवार बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहा।

​पानी के लिए तड़पता रहा बच्चा

बंधक बनी महिला नुसरत ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि अंदर उनका बच्चा पानी के लिए तड़प रहा था, लेकिन बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं था। जब परिवार ने चीखना-चिल्लाना शुरू किया, तब आसपास के राहगीरों का ध्यान उस ओर गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब मंजर देखा तो तुरंत एडीए अधिकारियों को फोन कर टीम वापस बुलाने को कहा।

​पुलिस के हस्तक्षेप के बाद खुली सील

पुलिस के दबाव के बाद एडीए की टीम दोबारा मौके पर पहुंची और सील खोलकर अंदर फंसे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद बिल्डिंग को फिर से सील किया गया। वहीं, भवन स्वामी नवीन कुमार का कहना है कि उन्होंने निर्माण के शमन (Compounding) के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन प्राधिकरण उस पर कार्रवाई करने के बजाय उत्पीड़न कर रहा है।

​इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर इन चार घंटों के भीतर किसी की तबीयत बिगड़ जाती या कोई अनहोनी हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? फिलहाल, एडीए के इस ‘अंधेर’ रवैये की पूरे शहर में चर्चा हो रही है।