भ्रष्टाचार का बोझ नहीं सह सकी टंकी… सिद्धार्थनगर हादसे पर अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तीखा प्रहार

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में रील बनाने के जुनून ने एक युवक की जान ले ली, लेकिन यह मामला अब केवल एक हादसा न रहकर बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। पानी की टंकी पर हुए इस दर्दनाक वाकये ने जहाँ प्रशासन की नींद उड़ा दी, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे भ्रष्टाचार और सरकारी विफलता का प्रतीक करार दिया है।

​सांस रोक देने वाला रेस्क्यू और मौत का तांडव

घटना की शुरुआत उस वक्त हुई जब पांच युवक सोशल मीडिया पर रील बनाने की सनक में एक बेहद ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए। दुर्भाग्य से, निर्माण की कमजोरी या जर्जर स्थिति के कारण टंकी की सीढ़ी और छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। इस मलबे के साथ नीचे गिरे तीन युवकों में से एक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। शेष दो युवक ऊपर ही फंसे रह गए, जिन्हें उतारने के लिए प्रशासन को पसीने छूट गए। अंततः, करीब 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सेना और वायुसेना के जांबाजों ने हेलिकॉप्टर की मदद से उन्हें एयरलिफ्ट कर सुरक्षित नीचे उतारा।

​अखिलेश यादव का कटाक्ष: “भ्रष्टाचार का बोझ नहीं झेल पाई टंकी”

इस घटना ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया है। लखनऊ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उन्होंने तंज कसा कि टंकी का छज्जा और सीढ़ियां इसलिए नहीं टूटीं कि उन पर वजन ज्यादा था, बल्कि इसलिए टूटीं क्योंकि वे “भ्रष्टाचार के भारी बोझ” को नहीं संभाल पायीं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस टंकी की पाइपलाइन मुख्यमंत्री आवास (5 कालिदास मार्ग) तक का रास्ता तय करती है, उसका यह हाल निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। हालांकि, उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सेना के जवानों की वीरता की जमकर सराहना भी की।

​चुनावी माहौल और ‘डीजे’ पर संग्राम

हादसे से शुरू हुई बातचीत देखते ही देखते चुनावी राजनीति तक पहुँच गई। अखिलेश यादव ने भाजपा पर आगामी चुनावों में डीजे के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का संगीन आरोप लगाया। सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह की आशंकाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक गानों और शोर के जरिए जानबूझकर तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब डीजे की आवाज से मुर्गियों की जान जा सकती है, तो यह इंसानी समाज और शांति के लिए कितना घातक होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

​प्रदेश की कानून-व्यवस्था और गोरखपुर का जिक्र

अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी सरकार को विफल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस न्याय दिलाने के बजाय झगड़े सुलझाने के नाम पर पक्षपात कर रही है। वाराणसी से लेकर गोरखपुर तक की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा सांसद खुद कह रहे हों कि वे सच उजागर करेंगे, तो स्पष्ट है कि तंत्र के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। अखिलेश ने मांग की कि सरकार केवल दिखावा न करे बल्कि ठोस कदम उठाए ताकि सिद्धार्थनगर जैसे हादसे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर लगाम कसी जा सके।