आगरा: विश्व प्रसिद्ध ताज महल की अद्वितीय खूबसूरती और आसपास के पर्यावरण को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए बनाए गए ‘ताज ट्रिपेजियम जोन’ (TTZ) के नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ नगर निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
सोमवार को नगर निगम की विशेष प्रवर्तन टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य खान-पान के प्रतिष्ठानों की औचक जांच के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान फतेहाबाद रोड और आवास विकास क्षेत्र के चार प्रसिद्ध रेस्टोरेंटों में कोयले की भट्ठियां जलती हुई पाई गईं। निगम की टीम ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए सभी भट्ठियों को बंद कराया, एक स्थान पर भट्ठियों को पूरी तरह नष्ट किया और संबंधित संचालकों पर कुल 50,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया।
बीकानेर वाला पर सबसे ज्यादा 25 हजार का जुर्माना
नगर निगम की टीम ने फतेहाबाद रोड स्थित लोकप्रिय रेस्टोरेंट ‘बीकानेर वाला’ में औचक निरीक्षण के दौरान कोयले की भट्ठी का खुलेआम इस्तेमाल होते पाया। पर्यावरण नियमों और टीटीजेड के प्रावधानों का उल्लंघन मिलने पर टीम ने संचालक पर 25 हजार रुपये का भारी जुर्माना लगाया। मौके पर ही जुर्माने की राशि वसूल कर भट्ठी को बंद कराया गया।
इसी मुख्य मार्ग पर स्थित ‘जिमबोरा क्लब’ और ‘पिरामिड रेस्टोरेंट’ में भी कोयले की भट्ठियां चलती पाई गईं, जिसके चलते दोनों प्रतिष्ठानों के संचालकों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों ने उन्हें भविष्य में कभी भी प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल न करने की सख्त चेतावनी दी।
ग्रामीण स्वाद में भट्ठी नष्ट, पांच हजार का जुर्माना
निगम की टीम ने सेक्टर-1, आवास विकास क्षेत्र स्थित ‘ग्रामीण स्वाद रेस्टोरेंट’ में भी छापेमारी कर कोयले की भट्टी पकड़ी। यहां रेस्टोरेंट के खुले मैदान में भट्ठियां लगाकर कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ भट्ठियों को बंद कराया, बल्कि उन्हें मौके पर ही पूरी तरह ध्वस्त कर नष्ट कर दिया। इस प्रतिष्ठान के संचालक पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा नियमों के विरुद्ध कोयले की भट्ठी चलाई गई, तो इससे भी अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी दिनों में भी शहरभर में जारी रहेगा अभियान
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सोमवार को शहर के विभिन्न इलाकों में रेस्टोरेंटों की जांच का यह अभियान शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टीटीजेड क्षेत्र के भीतर कोई भी प्रतिष्ठान नियमों को ताक पर रखकर कोयला या कोक का इस्तेमाल न करे।
नगर निगम की टीमें आने वाले दिनों में भी शहर के अलग-अलग जोन में औचक निरीक्षण करेंगी। अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल इन चार प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टीटीजेड नियमों की अवहेलना करने वाले अन्य व्यावसायिक केंद्रों पर भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी कोयले के इस्तेमाल पर रोक
ताजमहल को वायु प्रदूषण से होने वाले गंभीर नुकसान से बचाने के लिए ही ‘ताज ट्रिपेजियम जोन’ (TTZ) का गठन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के ऐतिहासिक आदेश के तहत टीटीजेड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कोयला और कोक के प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी। इस कड़े निर्देश का मुख्य उद्देश्य देश की इस ऐतिहासिक धरोहर को प्रदूषण के खतरनाक दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखना और पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखना है।
प्रदूषण बढ़ाता है कोयले का धुआं
विशेषज्ञों के अनुसार, कोयले के जलने से निकलने वाले धुएं में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और तमाम सूक्ष्म कण (Particulate Matter) भारी मात्रा में होते हैं, जो सीधे वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इन हानिकारक प्रदूषकों का बुरा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी पड़ता है। इसके अलावा, ताजमहल के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ने से उसके मशहूर सफेद संगमरमर (White Marble) पर भी पीलापन और प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की प्रबल आशंका रहती है। ऐसे में नगर निगम की यह कार्रवाई सीधे तौर पर ताज संरक्षण से जुड़ी हुई है।
प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं: नगर आयुक्त
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि टीटीजेड क्षेत्र के भीतर किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित ईंधन का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। शहर के सभी रेस्टोरेंटों और खान-पान के अन्य प्रतिष्ठानों में कोयले की भट्ठियों के इस्तेमाल की लगातार जांच कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां अर्थदंड वसूलने के साथ-साथ भट्ठी सील करने या बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की है कि वे पर्यावरण और ताज महल के संरक्षण को सर्वोपरि रखते हुए प्रतिबंधित ईंधन के प्रयोग से पूरी तरह बचें।
सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि रेस्टोरेंट संचालकों को जागरूक करना और उन्हें प्रतिबंधित ईंधन के प्रयोग से रोकना है, ताकि ताजमहल और ताजनगरी के पर्यावरण की शुद्धता को सुरक्षित रखा जा सके।


