मुंबई/आगरा: भारतीय सिनेमा में इन दिनों भक्ति, आध्यात्मिकता और महान ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर आधारित फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। हालिया फिल्म ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद, वर्ष 2025 में प्रदर्शित हुई हिंदी फिल्म ‘संत तुकाराम’ को फरवरी 2027 में एक बार फिर देश भर के सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज़ करने की तैयारी कर ली गई है।
फिल्म के निर्देशक आदित्य ओम ने बताया कि कुछ कानूनी विवादों के कारण शुरुआती प्रदर्शन के दौरान फिल्म का सफर बीच में ही रुक गया था। अब सभी अड़चनों के दूर होने के बाद इसे दोबारा दर्शकों के बीच लाया जा रहा है।
आवली जिजाबाई की भूमिका में दिखेंगी शीना चौहान, जीता बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड
15वीं शताब्दी के महान कवि-संत तुकाराम महाराज के जीवन और सामाजिक समानता के विचारों पर आधारित इस फिल्म में सुबोध भावे और शीना चौहान मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म में संत तुकाराम की धर्मपत्नी ‘आवली जिजाबाई’ के सशक्त किरदार के लिए अभिनेत्री शीना चौहान को हाल ही में मुंबई में आयोजित टाइम्स अप्लॉड पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (Best Actress) के खिताब से सम्मानित किया गया है।
फिल्म की दोबारा रिलीज़ पर खुशी जताते हुए शीना चौहान ने कहा— “भारत असाधारण कहानियों की धरती है। हमारी संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी फिल्में दर्शकों के दिलों को गहराई से छूती हैं। मुझे बेहद खुशी है कि ‘संत तुकाराम’ फरवरी में फिर से बड़े पर्दे पर आ रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग संत तुकाराम जी के विचारों और समानता के संदेश को समझ सकें।”
गांव-गांव घूमकर और महिलाओं संग वक्त बिताकर की तैयारी
शीना चौहान ने बताया कि आवली जिजाबाई के किरदार में उतरने के लिए उन्होंने काफी शोध किया। वे महाराष्ट्र के कई ग्रामीण इलाकों में गईं, स्थानीय महिलाओं के साथ रहीं, उनके साथ खाना बनाया और काम भी किया।
उन्होंने बताया— “आवली जिजाबाई केवल एक पत्नी ही नहीं थीं, बल्कि वे अपने पति के साथ दलित और महिला अधिकारों की मुखर समर्थक थीं। यह भूमिका मेरे लिए सामाजिक न्याय और उस दौर की महिलाओं के संघर्ष को समझने का एक अद्भुत अनुभव रही।”
500 साल पुरानी कहानी, लेकिन आज भी प्रासंगिक हैं मानवाधिकार
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी मानवाधिकारों पर आवाज उठा चुकीं शीना का मानना है कि यह फिल्म केवल धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा जैसे वैश्विक विषयों को उठाती है।
उन्होंने कहा कि लगभग 500 साल पुरानी यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी तब थी। भारतीय संतों और हमारी समृद्ध परंपराओं पर आधारित फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं।
गौरतलब है कि ‘संत तुकाराम’ के अलावा अभिनेत्री शीना चौहान जल्द ही आगामी पैन-इंडिया फिल्म ‘जातस्य मरणं ध्रुवम्’ और हिंदी वेब सीरीज़ ‘भयावा’ में भी मुख्य भूमिका निभाती नज़र आएंगी। फरवरी 2027 में फिल्म के दोबारा सिनेमाघरों में आने से एक बार फिर संत तुकाराम महाराज के विचार और संदेश जन-जन तक पहुँचेंगे।
