नई दिल्ली/लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कोलकाता दौरे और ममता बनर्जी से उनकी मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात को लेकर यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा पलटवार किया है। मौर्य ने दावा किया कि अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का साथ आने का कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि विपक्षी एकता का ‘गुब्बारा’ पहले ही फूट चुका है।
“2027 तो दूर, 2047 की सोचें सपा”
डिप्टी सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही सपा के प्रभाव की हवा निकलनी शुरू हो गई थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (2026) का जिक्र करते हुए कहा कि ममता बनर्जी की हार के बावजूद अखिलेश यादव का वहां जाना उनके भारी तनाव को दर्शाता है। केशव मौर्य ने कहा, “अखिलेश यादव समझ लें कि 2027 तो बहुत दूर की बात है, 2047 तक भी समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी की कोई संभावना नहीं है।”
जनगणना पर विपक्ष को जवाब
जनगणना में देरी के सवाल पर डिप्टी सीएम ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि कोरोना संकट के कारण इस प्रक्रिया में विलंब हुआ था। उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए कहा, “इस जनगणना में जाति का भी कॉलम है, जिसका लोगों को लंबे समय से इंतजार था। अखिलेश यादव को चिंता करने की जरूरत नहीं है, सभी जानकारी जनगणना आयोग को पारदर्शिता के साथ दी जाएगी।”
राजभर का भी हमला: “करार टूटने से नहीं जीतेंगे चुनाव”
दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। चुनावी रणनीतिकार एजेंसी ‘आईपैक’ (I-PAC) से सपा का करार टूटने पर राजभर ने कहा कि अब कोई भी कंपनी सपा को चुनाव नहीं जिता सकती। उन्होंने सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की नई परिभाषा देते हुए उसे ‘पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश’ करार दिया।


