उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार शाम से लेकर देर रात तक चले एक खौफनाक ड्रामे का अंत आखिरकार आरोपी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के साथ हुआ, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कुल 5 लोगों की जान चली गई। सबसे हैरान करने और झकझोर देने वाली बात यह रही कि एक सनकी शख्स ने खूनी खेल खेलते हुए अपनी ही पत्नी और मासूम बेटे तक को नहीं बख्शा।
आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने जानकारी दी है कि आरोपी ने अपने ही बच्चों को एक कमरे के भीतर बंधक बनाकर बंद कर रखा था और लगातार उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहा था। इसी दौरान उसने बंद कमरे के भीतर बच्चों पर फायरिंग कर दी, जिससे एक बच्चे को गोली लग गई। जैसे ही पुलिस टीम ने गोली चलने की आवाज सुनी, उन्होंने पलक झपकते ही दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया।
अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव का मामला
यह पूरी विचलित कर देने वाली घटना आजमगढ़ के अहरौला थानांतर्गत आने वाले शंभूपुर गांव की है। मंगलवार की शाम को अरविंद सिंह नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की निर्मम हत्या करने के बाद अपने बच्चों के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। जब पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने की चेतावनी दी, तो वह लगातार बच्चों को जान से मारने की धमकी देता रहा। काफी देर तक यह तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, और इसी बीच उसने रात के समय कमरे के भीतर मौजूद अपने बच्चे को गोली का शिकार बना दिया।
सरेंडर की चेतावनी के बाद बच्चे को मारी गोली
पुलिस प्रशासन के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंच गया था और आरोपी अरविंद को बच्चों सहित सुरक्षित कमरे से बाहर निकालने के प्रयास में जुट गया था। पुलिस की ओर से बार-बार पर्याप्त चेतावनी दिए जाने के बावजूद, सनकी आरोपी ने अपने ही एक मासूम बच्चे पर गोली चला दी। बच्चों की रक्षा के लिए जब पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की, तो आरोपी अरविंद भी गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी और घायल बच्चे दोनों को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया, जहां इलाज के दौरान आरोपी अरविंद और उसके बच्चे दोनों की मृत्यु हो गई।
गनीमत यह रही कि पुलिस ने मौके पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पूरी तरह से सकुशल और सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वर्तमान में घटनास्थल पर भारी पुलिस बल, एसओजी और फॉरेन्सिक टीम मुस्तैदी से तैनात है। मौके से तमाम जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और एसएसपी अनिल कुमार के निर्देशन में इस पूरे मामले की गहनता से आगे की जांच जारी है।
पंडितों से आधार कार्ड मांगने पर शुरू हुआ था विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, शंभूपुर गांव स्थित अरविंद सिंह के घर पर पिछले कुछ दिनों से एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान (पूजा) चल रही थी। मंगलवार की शाम को घर के भीतर तीन पंडित, अरविंद की पत्नी बबीता और उनके बच्चे मौजूद थे। शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच जब अरविंद बाजार से अपने घर लौटे, तो उन्होंने घर में पूजा-पाठ होते देखा। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद पंडितों से पूरी जानकारी मांगी और अचानक बौखलाते हुए उनसे उनके आधार कार्ड की मांग करने लगे। इसी बात को लेकर उनकी अपनी पत्नी के साथ तीखी बहस शुरू हो गई।
गुस्से में आपा खोते हुए अरविंद ने घर में रखी अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाली और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी की चपेट में आने से उसकी पत्नी बबीता और दो पंडितों की मौके पर ही मौत हो गई। मारे गए दोनों पुजारियों की पहचान महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के रूप में हुई है।
पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को बनाया बंधक
अपनी पत्नी और दो पुजारियों की बेरहमी से हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद ने खुद को बचाने के लिए अपने ही बच्चों को साथ लेकर खुद को एक कमरे में कैद कर लिया था। जब इस त्रिपल मर्डर (तीन लोगों की हत्या) की भनक गांववालों और पुलिस को लगी, तो हड़कंप मच गया। पुलिस के साथ-साथ अरविंद के रिश्तेदार और ग्रामीण भी मौके पर जमा हो गए और लगातार उससे सरेंडर करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था और बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच देर रात कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की भयानक आवाज गूंजी। इसके बाद पुलिस फौरन कमरे के भीतर दाखिल हुई, जहां आरोपी ने पुलिस दल पर भी गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी अरविंद घायल हो गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
