पीएनसी इंफ्राटेक पर 8.37 करोड़ के भुगतान रोकने का गंभीर आरोप: राजभवन के हस्तक्षेप के बाद आगरा पुलिस करेगी जांच

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आगरा। जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण सरकारी परियोजना से जुड़ी एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ‘पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड’ (PNC Infratech Ltd.) पर करोड़ों रुपये के भुगतान रोकने और कारोबारी को धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला अब शासन के गलियारों और राजभवन तक पहुँच गया है, जिसके बाद गृह विभाग ने आगरा पुलिस कमिश्नरेट को मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

​क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता गौरव कुमार जैन, जो राजस्थान के भरतपुर के निवासी हैं और ‘अरिहंत ट्रेडिंग कंपनी’ व ‘बाहुबली प्रोजेक्ट्स’ के संचालक हैं, ने आरोप लगाया है कि उनकी फर्म ने पीएनसी इंफ्राटेक के कार्यादेश पर कासगंज जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्माण कार्य संपन्न किए थे। कारोबारी का दावा है कि कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने के बावजूद कंपनी ने उनका 8.37 करोड़ रुपये का भुगतान रोक रखा है, जिससे उनकी फर्म भारी आर्थिक संकट से जूझ रही है।

​अधिकारियों पर लगे धमकी के आरोप

राज्यपाल सचिवालय को दी गई शिकायत में गौरव कुमार जैन ने पीएनसी इंफ्राटेक के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर सीधे आरोप लगाए हैं। इनमें कंपनी के निदेशक टी.आर. राव, एवीपी पी.सी. गुप्ता, एजीएम आर.के. जैन, प्रोजेक्ट मैनेजर रवि यादव और पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर सतीश सरोहा के नाम शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने अपना बकाया भुगतान मांगा, तो उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी गई और गंभीर धमकियां मिलीं।

शासन की सख्ती: राजभवन से गृह विभाग तक हड़कंप

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय ने 16 अप्रैल 2026 को इस शिकायत का संज्ञान लिया और गृह विभाग को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। इसके बाद 27 मई 2026 को गृह (पुलिस) अनुभाग ने आगरा पुलिस आयुक्त को पत्र जारी कर प्रकरण के सभी तथ्यों की जांच कर शासन को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। पत्र की प्रतिलिपि डीजीपी कार्यालय को भी भेजी गई है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इस मामले को प्राथमिकता पर ले रही है।

कंपनी का अपना पक्ष

दूसरी ओर, पीएनसी इंफ्राटेक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह पूरा विवाद केवल एक अनुबंधीय (Contractual) और भुगतान संबंधी असहमति का है। कंपनी के सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर पहले से ही एमएसएमई (MSME) और अन्य सक्षम न्यायिक मंचों पर प्रक्रियाएं चल रही हैं।

कंपनी का तर्क है कि इसे पुलिस मामला बनाना उचित नहीं है। हालांकि, पीएनसी इंफ्राटेक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है।

​क्यों है यह मामला संवेदनशील?

चूंकि यह जल जीवन मिशन से जुड़ा है, जो केंद्र और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं वाली जनकल्याणकारी योजना है, इसलिए किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमतिता या भुगतान विवाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चिंता का विषय है। अब सबकी निगाहें आगरा पुलिस कमिश्नरेट की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि क्या वास्तव में कोई आपराधिक साजिश थी या यह केवल व्यापारिक विवाद है।